प्राणायाम व ध्यान की मदद से एम्स ने ठीक किए हैं मरीजों के शरीर में विकार
इस बारे में एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मंजरी त्रिपाठी ने कहा कि समय के साथ डिमेंशिया की समस्या बढ़ती है। ऐसा देखा गया है कि 100 मध्यम स्तर के डिमेंशिया के मरीजों में से 25 में यह आगे चलकर गंभीर हो जाता है, जिसे फिर से ठीक कर पाना संभव नहीं है। इसे देखते हुए ऐसे मध्यम स्तर के डिमेंशिया के मरीजों पर योग को लेकर शोध किया जाएगा। यदि ऐसे मरीजों के स्तर में कोई बदलाव नहीं आता तो योग सहायक साबित होगा।
शरीर रचना विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. रीमा दादा ने कहा कि पहले भी शरीर के कई विकारों को ठीक करने के लिए ध्यान और प्राणायाम का सहारा लिया गया। इनकी मदद से विकारों को ठीक होने की गति काफी तेज पाई गई।
शोध के बेहतर परिणाम आए तो लाखों को फायदा
डॉ. रीमा का कहना है कि हमें उम्मीद है कि योग के आसन के प्रयोग से लोगों में भूलने की आदत को भी दूर किया जा सकेगा। यदि शोध के परिणाम बेहतर आते हैं तो देश के लाखों लोगों को इससे फायदा होगा। इस शोध में शामिल होने के लिए कोई भी 45 वर्ष से अधिक उम्र का व्यक्ति एम्स से संपर्क कर सकता है। विशेषज्ञों की देखरेख में एम्स के योगा केंद्र में उन्हें योग के आसन करवाएं जाएंगे। साथ ही उनपर होने वाले असर का भी निरीक्षण किया जाएगा।
यह दिखते हैं लक्षण
- छोटी-छोटी बात भूल जाना और याद न आना, भूलने के कारण बड़ी गलती करना
- व्यवहार और व्यक्तित्व में बदलाव आना, दोहरा व्यक्तित्व
- सामाजिक जीवन में तेजी से बदलाव सोना कम कर देना या ज्यादा सोना