साइबर अपराध थाना पूर्व की पुलिस ने एक सूचना के आधार पर एयरपोर्ट पर नौकरी लगाने के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से कॉल सेंटर संचालक और तीन युवतियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों से 13 मोबाइल बरामद किए हैं। पुलिस ने कॉल सेंटर संचालक को अदालत में पेश करके दो दिन के रिमांड पर लिया है।
31 मार्च को साइबर अपराध थाना पूर्व में एक महिला ने शिकायत दी थी कि उसके पास अनजान नंबर से कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने उसको एयरपोर्ट पर नौकरी लगाने के बारे में कहा और फर्जी नियुक्ति पत्र देकर उसके साथ ठगी कर ली। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच की। जांच के बाद मामले में कार्रवाई करते हुए सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी, साइबर अपराध) विकास कौशिक के नेतृत्व में साइबर अपराध थाना पूर्व की पुलिस ने दिल्ली के बदरपुर से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान मथुरा (उतर प्रदेश) के तिलका गढ़ी गांव निवासी राजू, दिल्ली के सरिता विहार निवासी सायमा बानो, दिल्ली के बदरपुर निवासी निहारिका उर्फ नीरज और नई दिल्ली के होज खास निवासी करिश्मा के रूप में हुई है।
जेल से बाहर आकर शुरू किया कॉल सेंटर
एसीपी विकास कौशिक ने बताया कि आरोपी राजू ने पूछताछ करने के दौरान बताया कि वह पहले दवाई बेचने का काम करता था और एयरपोर्ट पर नौकरी दिलाने के साइबर फ्रॉड करने में संलिप्त था। वर्ष 2023 में पुलिस ने राजू को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। जेल से बाहर आने के बाद वह बेरोजगार हो गया और उसने फिर से एयरपोर्ट पर नौकरी दिलाने के बहाने साइबर फ्रॉड के लिए कॉल सेंटर शुरू किया।
वेतन और कमीशन पर रखा स्टाफ
फर्जी कॉल सेंटर शुरू करने के बाद राजू ने निहारिका, सायमा बानो व करिश्मा को 12 हजार रुपये वेतन प्रतिमाह और साइबर फ्रॉड से प्राप्त होने वाली राशि का दो फीसदी कमीशन पर रखा था। आरोपी राजू ने आरोपी युवतियों को कॉल करने के लिए एक-एक कीपैड फोन और व्हाट्सएप मैसेज करने के लिए एक-एक स्मार्टफोन दे रखा था। एक माह बाद उन फोन व सिम कार्ड को तोड़ देता था और नए सिम कार्ड व फोन दे देता था।
फर्जी नियुक्ति पत्र भेजकर वसूले जाते रुपये
कॉल सेंटर पर काम करने वाली युवतियां आरोपी राजू द्वारा दिए गए मोबाइल नंबरों पर कॉल करके एयरपोर्ट पर नौकरी दिलाने के लिए बात करती थी। जब भी कोई व्यक्ति इनके जाल में फंस जाता तो युवतियां उसे विश्वास व झांसे में लेने के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र भेजती। वहीं, उनसे फीस के नाम पर 750 रुपये लेती और धीरे-धीरे विभिन्न औपचारिकताएं पूरी करने कके नाम पर रुपये ट्रांसफर करके धोखाधड़ी की वारदात को अंजाम देती।