अदालत ने अपने फैसले में चश्मदीद के गवाहों की गवाही को भी अहम माना। कुल 64 गवाहों ने अपनी गवाही में जज की पत्नी व बेटे को गोली मारने व कार में डालने की कोशिश करने की जानकारी दी, जो पुख्ता सबूत हैं। अदालत ने बचाव पक्ष के उस तर्क को खारिज कर दिया कि जिसमें गनमैन महिपाल को निर्दोष बताया गया था। अदालत ने कहा कि किसी भी गवाह पर कोई दबाव नहीं था, उनकी गवाही निष्पक्ष रही है।
जिला उप न्यायवादी अनुराग हुड्डा व अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता विशाल गुप्ता ने बताया कि जघन्य अपराध के कारण दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। घटना 13 अक्तूबर 2018 की है।
जज कृष्णकांत की पत्नी ऋतु व बेटा ध्रुव सेक्टर-49 स्थित ऑर्केडिया मार्केट में खरीददारी करने गए थे। इसी दौरान उनके गनमैन महिपाल ने दोनों को अपनी पिस्टल से गोली मार दी थी। दोनों को गंभीर हालत में पार्क अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां ऋतु ने दम तोड़ दिया था जबकि बेटे ध्रुव की अस्पताल में 10 दिनों के बाद मौत हो गई थी। महिपाल घटनास्थल से गाड़ी लेकर फरार हो गया था। पुलिस ने उसे गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड से गिरफ्तार किया था। आरोप था कि महिपाल जज के परिजनों के व्यवहार से गुस्से में था।