अपने गोरखधंधे का भंडाफोड़ न हो इसके लिए डिप्टी जेलर सीधे गोल्डी से डील करता था और जेल में चेकिंग में मिलने वाली छूट का फायदा उठाकर मोबाइल, सिमकार्ड, नशीला पदार्थ खुद ही लेकर जाता था। इतना ही नहीं जेल के अंदर कैदियों को जिस भी चीज की डिमांड रहती उसका बकायदा कोडवर्ड रहता। इन चीजों की डिप्टी जेलर को बाहर कैश पेमेंट होने के बाद सप्लाई की जाती थी।
पुलिस को शक है कि इन चीजों को कैदियों तक पहुंचाने के लिए जेल के अंदर भी आरोपी डिप्टी जेलर के गुर्गे है। पुलिस डिप्टी जेलर का मोबाइल और बैंक खाते खंगाल रही है। एसीपी क्राइम प्रीतपाल ने बताया कि अभी इस पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। अगर कोई और भी जेलकर्मी मिलता है तो उससे पूछताछ की जाएगी।
ये थी कीमत
सुल्फा (1ग्राम) - 1 से 4 हजार रुपये
सुल्फे वाली सिगरेट की डिब्बी- 10 हजार रुपये
साधारण फोन- 40 से 50 हजार रुपये
सिमकार्ड-15 से 20 हजार रुपये
स्मार्ट फोन- 40 से 50 हजार रुपये
जिस जेल का डिप्टी जेलर उसी में हुआ बंद
पुलिस की कार्रवाई के बाद शुक्रवार को आरोपी डिप्टी जेलर व उसके गुर्गे रवि को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। दोनों को उसी जेल में भेजा गया जहां वह अपने नशीले पदार्थ का नेटवर्क चला रहे थे।
12 मोबाइल जब्त किए
डिप्टी जेलर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने जेल में शुक्रवार को सघन जांच पड़ताल की। टीम ने जेल के अंदर 12 मोबाइल व 2 सिमकार्ड बरामद किए। ये मोबाइल जेल के अंदर बंद शातिर अपराधियों व गैंगस्टरों से मिले है। पुलिस को सन्देह है इन्हीं मोबाइल की बदौलत बदमाश जेल के अंदर से व्हाट्सएप कॉल के जरिये अपना नेटवर्क चला रहे थे। इनको रेवाड़ी में हुए डबल मर्डर, सोहना में सरपंच के पति पर जानलेवा हमला व भट्टा मालिक हत्याकांड समेत कई फिरौती के मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है।