फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सख्त हुआ गुरुग्राम जिला प्रशासन, 57 टीमों ने सील किए 200 से अधिक अवैध बोरवेल और ट्यूबवेल

Fri, 26 Jul 2019 07:23 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुरुग्राम
विज्ञापन
अवैध बोरवेल को सील करते अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

गुरुग्राम जिला प्रशासन ने जलशक्ति अभियान के तहत अवैध रूप से लगे बोरवेल पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इस सिलसिले में जिला प्रशासन ने शुक्रवार को अवैध बोरवेलों को सील करने और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चरों के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने के लिए एंफोर्समेंट ड्राईव चलाया। इसके तहत उपायुक्त अमित खत्री ने ताऊ देवी लाल स्टेडियम से 57 टीमों को रवाना किया। बरसाती पानी के संचयन और अवैध बोरवेल पर रोक लगाने के लिए यह एक बड़े पैमाने पर एक ही दिन में की गई बड़ी कार्रवाई थी।

विज्ञापन


उपायुक्त अमित खत्री के अनुसार 57 टीमों ने दो सौ से अधिक बोरवेल और ट्यूबवेल सील किए। इसके अलावा ड्राईव के दौरान छह घंटों में 49 जगहों पर पांच ठप और 14 आंशिक रूप से संचालित रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पाए गए। इस कार्रवाई के दौरान नगर निगम ने अपने 35 वार्डों में 126 बोरवेल और ट्यूबवेल, ग्रामीण क्षेत्र में 76 से ज्यादा बोरवेल सील किए। इनमें फरूर्खनगर ब्लॉक के 13, सोहना ब्लॉक के 28, पटौदी ब्लॉक के 23 और गुरुग्राम ब्लॉक के 13 ट्यूबवेल और बोरवेल शामिल हैं।  

टीमों को रवाना करने से पहले उपायुक्त अमित खत्री ने कहा कि आमतौर पर हम सख्त कार्रवाई की बात करते हैं और कहते हैं कि कोई भी अवैध बोरवेल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन जब कार्रवाई करने की बात आती है तो हम दृढ़ता से काम नहीं करते, यह गलत है। उन्होंने कहा कि अब उन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने का समय है जो अवैध रूप से बोरवेल के माध्यम से पानी निकाल कर बेच रहे हैं। 
विज्ञापन


उन्होंने टीमों को निर्देश दिया कि वे वास्तविक मायने में सख्त कार्रवाई करें और सार्वजनिक जगहों पर पाइप लाइनों में रिसाव की रिपोर्ट दें। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन के लिए पानी की बर्बादी को रोकने के अलावा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर का सही संचालन, अवैध बोरवेलों पर शिकंजा कसना और लीकेज आदि के माध्यम से व्यर्थ पानी बहने से रोकना जरूरी है।

विज्ञापन

स्कूलों में जल संसद की शुरूआत

जिला प्रशासन ने एक नई पहल के रूप में स्कूल में एक जल प्रबंधन प्रणाली स्थापित करने के लिए जल संसद भी शुरू की है। उपायुक्त अमित खत्री ने कहा कि जल संसद शुरू करने का उद्देश्य विद्यार्थियों की भागीदारी के माध्यम से ज्ञान को प्रसारित करना, और छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और प्रशासन के बीच जागरूकता पैदा करना है।

साथ ही इसके पीछे स्कूल और घर में पानी के उपयोग और अपव्यय का लेखा जोखा करने के लिए कौशल विकसित करना और स्व: प्रेरित होकर काम करना और विद्यार्थियों में एक अपनत्व की भावना पैदा करने का भी उद्देश्य है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जिला के 260 निजी स्कूलों को एक पत्र भेजा गया है, जिसमें ब्रोशर के साथ अपने अपने स्कूलों में जल संसद स्थापित करने का आदेश दिया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें