इंडिया गेट को बनाने में उस वक्त बेशक दस साल लगे हों लेकिन अब तीन महीने में इंडिया गेट तैयार मिलेगा। यही नहीं प्रेम का प्रतीक ताजमहल और आस्था का केंद्र लोटस टेंपल महज एक हफ्ते में बनकर तैयार हो जाता है।
यह कलाकारी है काष्ठ शिल्प के नेशनल अवार्डी महेशचंद्र शर्मा की। शर्मा वर्ष 1994 में नेशनल अवार्ड और वर्ष 2007 में शिल्प गुरु के अवार्ड से नवाजे जा चुके हैं। अपने हाथ से बनाई पांच दुर्लभ कलाकृतियां वह राजीव गांधी म्यूजियम को भेंट कर चुके हैं।
दिल्ली से आए काष्ठ शिल्पकार महेशचंद्र शर्मा ने बताया कि उनका यह कारोबार पुश्तैनी है। पहले वह चंदन आदि की लकड़ियों पर शिल्पकारी करते थे लेकिन उन लकड़ियों की उपलब्धता नहीं होने से अब सागौन और कदंब की लकड़ियों पर शिल्पकारी करते हैं।
वह बुल्गारिया, ओमान, नेपाल समेत चार देशों का भ्रमण कर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि इंडिया गेट को बनाने में करीब तीन माह का वक्त लगता है। जबकि ताजमहल और लोटस टैंपल एक हफ्ते में बनकर तैयार हो जाता है।
मेले में लगी तीनों कलाकृतियां दर्शकों के आकर्षण का केंद्र हैं। शर्मा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2010 में अपने हाथ से बनाई पांच कलाकृतियां इंडिया गेट, गोल्डन टेंपल, पशुपतिनाथ टेंपल, झरोका फ्रेम और जाली टेबल लैंप राजीव गांधी म्यूजियम को भेंट कर चुके हैं।
अन्य को हुनर सिखाने की तमन्ना
शर्मा का कहना है कि सरकार ने उन्हें वर्ष 2007 में शिल्प गुरु के सम्मान से नवाजा है। ऐसे में मेरी जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने इस हुनर को अन्य लोगों को सिखाएं। सरकार उन्हें कोई ऐसा प्लेटफार्म उपलब्ध कराए जिससे कलाकृति के प्रेमियों को हुनर सिखाया जा सके। क्योंकि अब धन कमाने की लालसा नहीं है।