एनसीआरटीसी मुख्यालय का दौरा कर प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता वाली टीम से मुलाकात की
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। विश्व बैंक के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने अर्बन ट्रांसिट के लिए आरआरटीएस परियोजना में सहभागिता पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के कॉर्पोरेट कार्यालय का दौरा किया। इस चर्चा का मुख्य विषय आरआरटीएस कॉरिडोर के वित्तीय पोषण पर रहा। विश्व बैंक में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रीय निदेशक पंकज गुप्ता के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल की अध्यक्षता वाली टीम से मुलाकात की। दिल्ली-गुरुग्राम- अलवर रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) प्रस्तावित है।
विश्व बैंक दिल्ली-गुरुग्राम के बीच आरआरटीएस कॉरिडोर को वित्तपोषित करने के लिए भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है। प्रतिनिधिमंडल ने भारत की पहली आरआरटीएस परियोजना को लागू करने में एनसीआरटीसी द्वारा इस्तेमाल की गई उन्नत तकनीकों की सराहना की और विशेष रूप से दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के लिए लक्षित समय सीमा को पूरा करने को सराहा है। प्रतिनिधिमंडल ने इस परियोजना में एनसीआरटीसी की विकास योजना पर भी ध्यान दिया है। आरआरटीएस का क्रियान्वयन क्षेत्र में भीड़भाड़ और प्रदूषण को दूर करने की व्यापक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यापक कार्य योजना का हिस्सा है।
22 स्टेशन प्रस्तावित है
दिल्ली-एनसीआर में यातायात को बेहतर करने के लिए आरआरटीएस कॉरिडोर बनाया जाना है। इसके तहत दिल्ली-अलवर रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम को दिल्ली, गुरुग्राम, रेवाड़ी और अलवर को जोड़ने वाला 164 किलोमीटर सेमी-हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाया जाना है। आरआरटीएस कॉरिडोर में दिल्ली-अलवर प्रोजेक्ट में 22 स्टेशन बनाए जाएंगे। इसमें गुरुग्राम में सेक्टर 17, राजीव चौक, खेड़कीधौला, मानेसर, पंचगांव, बिलासपुर चौक, धारूहेड़ा डिपो, रेवाड़ी, बावल व अलवर समेत अन्य स्टेशन होंगे। लंबे समय से योजना फाइलों पर ही चल रही है।