गुरुग्राम। तीन मई को लॉकडाउन हटाए जाने पर संशय को देखते हुए प्रवासी लोगों के सब्र का बांध टूट रहा है। पुलिस व प्रशासन की अपील व निगरानी के बावजूद मजदूर घर जाने के लिए पैदल ही निकल रहे हैं। मुख्य सड़कों पर पुलिस के पहरे को देखते हुए अब ये लोग खेतों व कच्चे रास्तों से निकलने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय पुलिस अधिकारी इन्हें रोकने के लिए पार्षद, सरपंच व अन्य लोगों से अपील कर रहे हैं।
सोहना व मेवात के रास्ते प्रवासी मजदूर घरों के लिए निकल रहे हैं। पुलिस के आला अधिकारियों के मुताबिक सभी प्रमुख रास्तों पर पुलिस की नाकाबंदी होने के कारण अरावली, खेतों व कच्चे रास्तों से ये मजदूर जा रहे हैं। कई बार पुलिस इन्हें रोककर नजदीकी शेल्टर होम में छोड़ देती है लेकिन ये दोबारा निकल जाते हैं। इस संबंध में खुफिया विभाग भी निगरानी रख रहा है।
सोहना सदर थाना प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र रावल ने बताया कि उनके क्षेत्र से यूपी-बिहार जाने वाले 26 मजदूरों को वापिस भेज दिया। 22 अप्रैल रात को मारुति कुंज से मध्य प्रदेश जा रहे 6 मजदूरों को वापिस भेजा। इसके अलावा राजस्थान भिवाड़ी से इलाहाबाद जा रहे 4 मजदूरों को रोका। बावल से कानपुर जा रहे 2 युवकों को वापिस भेजा। सिकंदरपुर से साइकिल पर बिहार जा रहे 4 मजदूरों को रोका। बादशाहपुर से 4 मजदूरों को पुलिस ने लौटाया। सेक्टर-37 मोहम्मदपुर झाड़सा गांव से साइकिलों पर बिहार जा रहे 6 मजदूरों को पुलिस ने रोककर वापिस भेजा।
आईएमटी मानेसर, पंचगांव समेत आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में अभी भी हजारों श्रमिक रुके हुए हैं। यह लोग साधनों के अभाव व पुलिस की निगरानी को देखते हुए केएमपी से सटे गांवों से होकर निकल रहे हैं। भांगरौला गांव निवासी हनुमान ने बताया कि रोजाना काफी संख्या में श्रमिक पैदल और साइकिलों से निकलते हैं जिन्हें गांव के युवा रोकने की कोशिश भी करते हैं।