हाईटेक सिटी में पेयजल किल्लत: भाग एक
2031 तक के लिए बनी थी योजना...2024 में ही तोड़ गई दम, पेयजल को लेकर शहर में गंभीर हो चुके हैं हालात, सिस्टम भी हुआ लाचार
पूनम।
गुरुग्राम। वर्ष 2008 में जब एनसीआर वाटर चैनल नहर बनी तब गुरुग्राम और मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र को वर्ष 2031 तक इससे पानी उपलब्ध कराने का खाका खींचा गया। एनसीआर के साथ गुड़गांव वाटर चैनल भी चल रहा है मगर 2024 में इन दोनों चैनलों के साथ प्लांट के जलशोधन का विस्तार भी फेल हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि 2031 के जलापूर्ति के मास्टर प्लान को समय-समय पर जरूरत के मुताबिक अपडेट नहीं किया गया। नए सेक्टरों और नई बसावट में जनसंख्या का अनुमान गलत लगाया गया। नतीजतन हर साल गर्मी में शहर के लाेग पानी के संकट से जूझ रहे हैं।
नगर निगम और जीएमडीए के एक पूर्व इंजीनियर बताते हैं कि अगर समय पर नए संयंत्र का निर्णय ले लिया गया होता तो आज जल संकट की ये हालत नहीं होती। गुरुग्राम में पानी को लेकर जो त्राहि त्राहि मची है, उसमें राहत मिलती। करीब चार साल पहले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की जल शोधन क्षमता को 100 एमएलडी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया था। मुख्यमंत्री के साथ बैठक के दौरान इंजीनियर की बात को यह कहकर नकार दिया गया कि गुरुग्राम की जनसंख्या अभी उतनी नहीं बढ़ी। हालांकि दो साल बाद 2022 में यही निर्णय लिया गया।
चंदू बुढ़ेरा के प्लांट में 100 एमएलडी का एक संयंत्र तैयार हो रहा है। यह दो साल पहले बन जाता तो शहर वासियों को इतनी परेशानी नहीं होती। शहर में पानी की मांग करीब 700 एमएलडी की है और दोनों संयंत्रों की पूर्ण क्षमता 570 एमएलडी की है। 50-60 एमएलडी शहर के ट्यूबवेलों से मिल रहा है। यानी जोड़ तोड़ कर शहर को कुल 600 एमएलडी पानी मिल पा रहा है। शहर के लोग वैध-अवैध टैंकरों से प्यास बुझाने को विवश हैं। जीएमडीए और नगर निगम गर्मी को देखते हुए योजनाएं बनाने में विफल रहे हैं। चंदू बुढ़ेरा का 100 एमएलडी का प्लांट तैयार नहीं हुआ है। सेक्टर 72 के बूस्टिंग पिछले दो साल से 95 प्रतिशत बनकर जमीन विवाद में लटका है।
कहीं जल संकट, कहीं बर्बादी तो कहीं चोरी
एक ओर सेक्टर 57, सुशांत लोक टू, थ्री,आरडी सिटी, डीएलएफ फेज -2 तक पानी पहुंच नहीं पा रहा है, तो दूसरी और जिन इलाकों में बगैर बूस्टिंग स्टेशन पर पानी जमा किए प्लांट की सीधी लाइन से पानी जा रहा है, वहां पानी की बर्बादी भी है और चोरी भी। नगर निगम के कुछ बूस्टिंग स्टेशन अधूरे हैं। नतीजतन कुछ इलाकों में पानी है कुछ जगह लोगों के हलक सूख रहे हैं। हालांकि पिछले सालों के दौरान जीएमडीए ने रॉ नहरी पानी को जमा करने की क्षमता बढ़ाई है। पहले तीन दिन तक शहर के लिए पानी का स्टॉक होता था, अब छह दिनों के लिए है। यानी अगर नहर से छह दिन पानी नहीं मिला तो भी शहर को पानी मिलता रहेगा।
नहरी पानी की क्षमता हुई कम, पानी चोरी पर नियंत्रण नहीं
गुड़गांव वाटर चैनल वर्ष 1995 में बना। इससे बसई ट्रीटमेंट प्लांट में पानी आ रहा है। इसकी क्षमता 175 क्यूसेक पानी की थी। मगर इसमें अभी 100 क्यूसेक पानी आ रहा है। इसका 1500 करोड़ के खर्च पर नवीकरण किया जाना है ताकि इससे 220 क्यूसेक पानी गुरुग्राम के लिए आ सके। मगर इस नहर के किनारे कच्चे होने के कारण इसमें पानी की चोरी भी होती है। इससे इसकी क्षमता भी कम हुई है।
नगर निगम के पास नहीं है किरायेदार और पीजी के आकड़े
30 साल पुरानी पाइप लाइनें, जर्जर मोटर और सबको समान पानी की आपूर्ति जैसी परेशानियों के बीच नगर निगम की शुरुआत से यह परेशानी रही है कि इनके पास किस इलाके में कितने लोग हैं, इसका कोई सही आकड़ा नहीं है। पुराने शहर में मुहल्लों और शहर के बीच में बसे गांवों में काफी संख्या में किराएदार हैं। जगह-जगह लोगों ने घरों को पीजी का रूप दे दिया है। नगर निगम के पास ऐसी मशीनरी नहीं जो किराएदारों और पीजी में रहने वालों के रिकॉर्ड रखे।
नगर निगम और जीएमडीए के पास शहर की मौजूदा जनसंख्या के अनुमान का कोई मुकम्मल ग्राफ नहीं है। करीब दो साल पहले पांच लाख 71 हजार लोगों की प्रॉपर्टी आईडी के आधार पर 27 लाख की आबादी अनुमानित की गई। मगर सेक्टर 58 से 115 के बीच बहुत सारी बिल्डर लाइसेंस कॉलोनियां बन गई। आबादी 30 लाख से ज्यादा है। दूसरी और नहरी पानी या जलशोधन संयंत्र क्षमता के अनुरूप हमेशा 100 फीसदी काम नहीं करते। अगर 570 एमएलडी की पूर्ण क्षमता है तो शहर को 520-30 से ज्यादा पानी नहीं मिलता।
हाईलाइटर:
गुरुग्राम में नहरी पानी के जल शोधन की क्षमता
- बसई के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में - 270 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन)
- चंदू बुढ़ेरा के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में - 300 एमएलडी
- शहर में कुल पानी की सप्लाई 570 एमएलडी
- चंदू बुढ़ेरा के प्लांट में एनसीआर वाटर चैनल से पानी आता है, इसकी क्षमता - 500 क्यूसेक (क्यूबिक फुट प्रति सेकेंड) एक क्यूसेक लगभग 28.317 लीटर के बराबर
- जीएमडीए को मिल रहा है - 208 क्यूसेक
- वर्तमान समय में उपलब्धता है- 140 क्यूसेक
- वर्ष 2031 के लिए अनुमानित मांग - 240 क्यूसेक
- गुड़गांव वाटर चैनल - फिलहाल क्षमता - 140 क्यूसेक, उपलब्धता -110 क्यूसेक
- 2031 के अनुसार जरूरत - 200 क्यूसेक
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भविष्य की योजनाओं में
- चंदू बुढ़ेरा के प्लांट में दो 100- 100 एमएलडी के जल शोधन संयंत्र तैयार होने हैं, इनमें से एक पूरा होने की कगार पर है। दूसरा शुरू नहीं हुआ है।
- बसई के प्लांट में एक 100 एमएलडी जल शोधन संयंत्र बनाने की योजना है। अभी 90-90 एमएलडी के तीन संयंत्र से कुल 270 एमएलडी जलशोधन क्षमता है।
विशेषज्ञ ने कहा
शहर में जरूरत 675 से 700 एमएलडी पानी की है मगर नहरी और ट्यूबवेल समेत बमुश्किल 600 एमएलडी पानी की सप्लाई है। लाइन से पानी को चोरी पर कंट्रोल हो और लोग न्यायपूर्ण तरीके से पानी खर्च करें। जलापूर्ति के लिए जनसंख्या का अनुमान सही नहीं है। अभी जरूरी है कि जो 100 एमएलडी का संयंत्र बन रहा है, उसे जल्द तैयार किया जाए। जो सेक्टर अरावली की ओर ऊंचाई पर हैं, उनके लिए पानी की विशेष व्यवस्था हो। - प्रदीप कुमार , पूर्व मुख्य अभियंता जीएमडीए