- केएमपी के सुधार कार्य पर ब्रेक, तारकोल की किल्लत से विकास की गति थमी
- एचएसआईआईडीसी ने करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से कुंडली-मानेसर पलवल (केएमपी) को ठीक कराने का काम एजेंसी को दिया
दीपक वर्मा
मानेसर। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव विकास कार्यों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। युद्ध के चलते अब सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले तारकोल की कमी से निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। इससे विकास की गति धीमी पड़ने लगी है। खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध का असर सड़क निर्माण परियोजनाओं पर भी दिखने लगा है। युद्ध के कारण तारकोल की आपूर्ति में कमी आई है, जो सड़क निर्माण में आवश्यक सामग्री है। इस कमी के चलते कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, और परियोजनाओं की गति धीमी हो गई है।
तारकोल की कमी का असर हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एचएसआईआईडीसी) के सड़क मरम्मत कार्य पर दिखने लगा है। एचएसआईआईडीसी ने लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से पचगांव से पलवल तक करीब 53 किलोमीटर लंबी सड़क के कायाकल्प का जिम्मा एक एजेंसी को सौंपा है। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक केवल 25 प्रतिशत काम (पलवल से खलीलपुर तक) ही पूरा हो पाया है। तारकोल की कमी के कारण खलीलपुर से पचगांव तक का काम बीच में ही अटक गया है। विभाग अब वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश में जुटा है ताकि प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो सके। यदि युद्ध लंबा खिंचा, तो निर्माण लागत बढ़ने के साथ स्थितियां और चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।
-
केएमपी जर्जर होने से हो रही परेशानी
एचएसआईआईडीसी के सर्वे में खलीलपुर से पलवल तक के मार्ग पर सबसे ज्यादा खामियां पाई गई थी। जर्जर सड़क से वाहन चालकों को परेशानी हो रही थी। बारिश में कई जगहों पर सड़क टूटी हुई है। ऐसे में एचएचआईआईडी इस सड़क को बनवा रहा है।
केएमपी एक्सप्रेसवे के पास पचगांव से पलवल तक सड़कों को ठीक करने का काम चल रहा है। खलीलपुर से पलवल तक का काम पूरा हो चुका है। अब खलीलपुर से पचगांव तक सड़क बनाने का काम बाकी है, जिसे जून तक पूरा करने की उम्मीद है। -अरुण गर्ग, एजीएम, एचएसआईआईडीसी