गुरुग्राम (विनोद डबास)। कोरोना महामारी के कारण जिले में जल संरक्षण योजना पर ब्रेक लग गया है। इसके अलावा कुछ गांव नगर निगम में शामिल किए जाने के कारण भी जल संरक्षण की योजना प्रभावित हो गई है। जिला प्रशासन ने जल संरक्षण के लिए करीब डेढ़ साल पहले गुरुजल सोसाइटी का गठन करके उसे 30 गांवों के तालाबों को विकसित करने का लक्ष्य दिया था, मगर सोसाइटी मात्र चार तालाबों को ही विकसित कर सकी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण करने के आह्वान के बाद जिला प्रशासन ने डेढ़ साल पहले गुरुजल सोसाइटी का गठन किया था। प्रशासन ने जल संरक्षण के लिए सोसाइटी के माध्यम से पंचायत विभाग के तहत आने वाले गांवों के तालाबों को विकसित करने का निर्णय लिया था। इस कड़ी में सोसाइटी को पहले फेज में डेढ़ साल के दौरान 30 गांवों के तालाब विकसित करने का लक्ष्य दिया था, मगर गत वर्ष मार्च में कोरोना की दस्तक के कारण तालाबों को विकसित करने की योजना लटक गई है।
सोसाइटी डेढ़ साल के दौरान खेंटावास, मौजपुर, भोडाकलां व इकबालपुर गांवों के तालाबों को विकसित कर सकी। इसके अलावा कासन, वजीरपुर एवं भोंडसी गांव नगर निगम में शामिल कर दिए गए। सोसाइटी ने अब इन तीनों गांवों के तालाबों को विकसित करने का कार्य बंद कर दिया है, क्योंकि वह केवल पंचायत विभाग के तहत आने वाले गांवों के तालाबों को विकसित कर सकती है। इन दोनों प्रकरण के बाद जिला प्रशासन ने 17 गांवों के तालाबों की सूची से हटा दिया है। इस तरह सोसाइटी अब पहले फेज में नौ गांवों के तालाबों को विकसित करने पर कार्य कर रही है। वहीं, जिला प्रशासन दूसरे फेज के लिए गांवों के नामों को अंतिम रूप नहीं दे सका है।
सोसाइटी की पदाधिकारी अंजलि शर्मा बताती हैं कि कोरोना के कारण करीब छह माह तक तालाबों को विकसित करने का कार्य बंद रहा। इसके बाद सोसाइटी के समक्ष बजट की भी दिक्कत रही। इस कारण पहले फेज की समयसीमा बढ़ाने के साथ-साथ के गांवों के नामों की सूची संशोधित की जा रही है। इस सूची में 17 अन्य गांवों को शामिल किया जाएगा।
इन गांवों में जल संरक्षण के लिए तालाबों को किया जा रहा है विकसित
नवादा, धर्मपुर, दौलताबाद, हरियाहेड़ा, दौला, ताज नगर, बुढ़ेडा, पालसोली व बिलासपुर।