आरोपी ने पूछताछ में बताया कि मामले में ठगी गई राशि 2.92 करोड़ उसके अन्य साथी आरोपियों द्वारा अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई थी। इनमें से 39 लाख रुपये अशीषभाई रमनलाल राणा द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खाते में ट्रांसफर हुए थे। यह बैंक खाता उसके भाई मितेश ने ही उसे उपलब्ध कराया था। इसके बाद अशीषभाई रमनलाल राणा ने वह बैंक खाता साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। अशीषभाई रमनलाल राणा के भाई मितेश को यह बैंक खाता उपलब्ध कराने के बदले 12.80 लाख रुपये मिले थे।
क्या था मामला
दिनांक 04.12.2024 को एक महिला ने पुलिस थाना साइबर अपराध पूर्व, गुरुग्राम में एक लिखित शिकायत के माध्यम से बताया कि इसके बेटे के पास एक व्हाट्सएप ऑडियो कॉल आई, जिसमें बताया गया कि इसके बेटे के आधार कार्ड का प्रयोग हवाला के काम में हुआ है। इसने मना कर दिया तो उन्होंने फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर एफआईआर दर्ज कराने का डर दिखाया फिर उन्होंने एक सीबीआई अफसर से वीडियो कॉल करके इनको डिजिटल अरेस्ट करने की बात कही और इसका नाम हवाला के केस में शामिल होने का डर दिखाते हुए इससे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 2 करोड़ 92 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। इस शिकायत पर पुलिस थाना साइबर अपराध पूर्व , गुरुग्राम में संबंधित धाराओं के तहत अभियोग दर्ज किया गया।
डिजिटल अरेस्ट करके 2.92 करोड़ रुपये ठगने के मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अब तक आरोपी अशीषभाई रमनलाल राणा व इसके भाई मितेश सहित 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अशीषभाई रमनलाल राणा को दो दिन की रिमांड पर अन्य वारदातों व अन्य साथी आरोपियों के बारे में पूछताछ की जा रही है। मामले में संलिप्त अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा। - प्रियांशु दीवान, सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर अपराध), गुरुग्राम।