संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। हिंसा ने एक बार फिर मेवात के विकास को पछाड़ दिया है। जहां एक ओर से हिंसा के दौरान हुई आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं से आमजन को नुकसान पहुंचा था। वहीं अब खरीदारों के दूरी बनाने से जमीन के दाम धड़ाम हो गए हैं। जिले में करीब 60 लिंक रोड बनवाए गए थे। केएमपी और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे भी मेवात से निकाला गया है। इसकी वजह से आसपास की जमीनों की कीमत एक करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। नूंह हिंसा के बाद से खरीदारों ने अब जमीनें खरीदने में रुचि दिखाना बंद कर दी है। इसके चलते तेजी से कीमतें गिरने लगी हैं। यहां के विकास की रफ्तार पर तो रोक लग ही गई है। इसके परिणाम भी कुछ दिन बाद देखने को मिलेंगे।
केएमपी और मुंबई एक्सप्रेसवे के अलावा यहां करीब चार दर्जन लिंक रोड निकाले जाने से खुशहाली नजर आने लगी थी। जमीन के रेट भी तेजी से बढ़ रहे थे। बाहर से लोग यहां जमीन की तलाश में घूम रही थे, लेकिन 31 जुलाई को हुई नूंह हिंसा ने इलाके को फिर 20 साल पीछे धकेल दिया है। जमीन का यहां कोई दूर तक भी खरीदार नजर नहीं आ रहा है । ऐसे में जो सौदे हुए थे वह भी रद्द हो गए हैं। एक खरीदार ने बताया कि उजीना गांव में 10 एकड़ जमीन 90 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से खरीदी थी, लेकिन आज 70 लाख के हिसाब से भी कोई खरीदार नहीं है।
बता दें, कि नूंह जिला अन्य जिलों से पिछड़ा है। दर्जनों गांव आज भी ऐसे हैं जहां सडक़ बनने की जरूरत है। क्योंकि सडक़ न होने के कारण एक-दो किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव में पहुंचने के लिए घूम कर 10-10 किलोमीटर लंबे चक्कर काटने पड़ते हैं। इस समस्या को सरकार ने समझते हुए जिले की तीन विधानसभा में करीब 60 लिंक रोड बनाने की मुख्यमंत्री घोषणा की, जो लगभग पूरी हो गई। दो बड़े हाईवे भी बनाए गए हैं।
ये बनाई गई हैं सड़कें
- कुर्थला गांव से अकबरपुर नाटौल गांव तक।
- उजीना से दानीवास गांव तक।
- हिरमथला से मेलावास गांव तक।
- भिरावटी से कालियाका गांव तक।
- पोंडरी से आलदोका गांव तक।
- उजीना से सुडाका गांव तक।
- गांगोली से किरा।
- पौंडरी से गांगोली।
- गांगोली से खेड़ाखलीलपुर तक।
- दुबालू से नौरंगाबाद तक।
- किरा से पौंडरी गांव तक।
- शीशवाना से झोंपड़ी गांव तक।
- मानूवास से किरंज-जैंदापुर गांव तक।
- छपेड़ा से खेड़ली दोसा गांव तक।
- उजीना से बीरसिका गांव तक।
- उजीना से नौसेरा गांव तक।
- घासेड़ा से छपेड़ा।
- घासेड़ा से छछेड़ा गांव तक।
- बैंसी से आलदोका गांव तक।
- आलदोका से बाजडक़ा गांव तक।
इसी प्रकार पुन्हाना व फिरोजपुर झिरका में भी इसी प्रकार लिंक रोड बनाए गए हैं।
ग्रामीण अंचल में सडक़ों का जाल बिछाने से तरक्की होगी। कुछ सड़कें और बनेगी। इससे निश्चित तौर पर इससे ग्रामीण विकास को पंख लगेंगे। नूंह हिंसा से यहां से संदेश अच्छा नहीं गया है। कुछ दिन में फिर हालात सामान्य हो जाएंगे।
- धीरेन्द्र खड़गटा, उपायुक्त नूंह
हमारी सरकार की कोशिश है कि ग्रामीण विकास को गति मिले। लिंक रोड के अलावा अन्य ग्रामीण विकास इसी कड़ी का हिस्सा है। हिंसा से मेवात को फिर 20 साल पीछे धकेलने का काम किया गया है। जब तक लोग समझेंगे नहीं तब तक कुछ लोग हिंसा जैसी घटनाओं के जरिये मेवात को पीछे धकेलने का काम करते रहेंगे।
सुरेंद्र प्रताप देशवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा