क्षेत्रीय इतिहास को नए सिरे से जानने में मिलेगी मदद, नष्ट हो चुकी हैं कई ऐतिहासिक विरासतें
पूनम
गुरुग्राम। पिछले दिनों मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा की 66 ऐतिहासिक धराेहरों के जीर्णोद्धार संबंधित स्वीकृति दी है। हालांकि, ऐसी 110 विरासतों की सूची बनी है। इनमें पांच धरोहरें गुरुग्राम के पास हैं, जिनका जीर्णोद्धार होगा। शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के अनुसार पूरी तरह उपेक्षित इन धरोहरों को संभालने से क्षेत्रीय इतिहास और संस्कृति को दुनिया बेहतर तरीके से जान सकेगी।
देश की राजधानी दिल्ली के पास होने के बावजूद इनके बारे अध्ययन करने वालों को भी इन ऐतिहासिक धराेहरों की कम जानकारी है। जिन विरासतों का जीर्णोद्धार किया जाना है उनमें बादशाहपुर की बावड़ी, सोहना का किला, फर्रुखनगर का शीश महल, सोहना में कुतुब खान की मस्जिद और सोहना का किला शामिल है।
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शीश महल
फर्रुखनगर बाजार में स्थित इस महल के साथ खूबसूरत लैंडस्केपिंग के साथ गार्डन हुआ करता था। इसके गार्डन में नहर की संरचना और तालाब भी बेहतर रहा है। इसका निर्माण फर्रुखशियर के गर्वनर फौजदार खान ने 1733 कराया था। इसका एक बार जीर्णोद्धार 2008-2009 में भी हुआ था। यह एक दो मंजिला भवन था, जिसे स्थानीय पत्थरों, स्लेट और चूना पत्थर से बनाया गया था। शीश महल में शीशे लगे थे। इसकी नक्काशी और खूबसूरती देखने लायक थी। हालांकि इसकी दीवारें नष्ट हो चुकी हैं।
मेवाती राजपूत राजाओं की विरासत
शोधकर्ताओं के अनुसार लाल गुंबद, कुतुबखान की मस्जिद और सोहना का किला मेवात के राजपूत शासकों द्वारा बनाई इमारतें हैं। जिन्होंने बाद में इस्लाम धर्म को अपना लिया था। 15 से 16वीं सदी में लोदी वंश के शासन काल के दौरान बना लाल गुंबद लाल पत्थर से बना जोड़ा गुंबद और एक बड़ा गुंबद है। सांप की नांगली गांव की यह धरोहर बिल्कुल उपेक्षित रहा है। इसी तरह सोहना में कुतुबखान की मस्जिद के मेहराब और लाल पत्थर के गुंबद और इसके भीतर इंटीरियर इस आयताकार मस्जिद को खास बनाता है। मस्जिद बालू पत्थर से बना है। इस मस्जिद को स्थानीय लोगों ने गोबर और उपले के रखने की जगह के लिए प्रयोग करना शुरू कर दिया था। सोहना और तावडू के किलों को पहाड़ के ऊपर मेवात के शासकों ने बनाया था। जो वॉच टावर की तरह प्रयोग में लाया जाता था।
बादशाहपुर की बावड़ी
1905 में बनी यह बावड़ी वास्तुशिल्प के हिसाब से कलात्मक और ऐतिहासिक है। यह जल संचयन और जल संरक्षण की पुराने तरीकों का प्रतीक भी है। कूड़े के ढेर में यह दब गया था। मिडलैंड क्रेडिट ने इसे ढूंढा आईएम गुड़गांव, धरातल और बावड़ी की 10 मीटर की खुदाई की गई है। इसके साथ तालाब भी हुआ करता था। इस बावड़ी को कूड़े से निकाला जा चुका है। हालांकि, यह भी कहा जाता है कि यह बावड़ी और ज्यादा पुरानी है।
वर्जन
गुरुग्राम में पांच राज्य संरक्षित ऐतिहासिक धरोहरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इनमें शीशमहल, लाला गुंबद, कुतुब खान की मस्जिद, सोहना फोर्ट और बादशाहपुर बावड़ी शामिल हैं। इसके अलावा कुछ फरीदाबाद, पलवल और नूंह की धरोहरें भी हैं। इनके जीर्णोद्धार उनकी स्थिति पर निर्भर करेगा। - डॉ. बनानी भट्टाचार्य, इतिहासकार, उपनिदेशक पुरातत्व विभाग हरियाणा
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हम लोगों ने सांस्कृतिक विरासतों के लिए अमेरिकन एंबेसडर फंड से वर्ष 2008-09 में इन धरोहरों का दस्तावेज तैयार किया था। इन धरोहरों के जीर्णोद्धार से इतिहास और संस्कृति को नए सिरे से जानने का मौका मिलेगा। दिल्ली के पास होने के बावजूद लोग क्षेत्रीय इतिहास के बारे नहीं जानते हैं। हालांकि, ये धरोहरें बहुत नष्ट हो चुकी हैं मगर जो बची हैं, उससे हमारी सांस्कृतिक विरासतों को दुनिया जान सकेगी। - डाॅ. वंदना सिन्हा, निदेशक, सेंटर फॉर आर्ट एंड आर्कियोलॉजी, अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन स्टडीज