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Gurugram News: ज्ञान, कला और संगीत का पर्व आज

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पीले फूलों से होगा मां शारदे का पूजन, पंडालों सांस्कृतिक कार्यक्रम और पुष्पांजली
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बसंत पंचमी का पर्व आज यानी शुक्रवार को मनाया जा रहा है। गुरुग्राम के रहने वाले देश भर के लोग अपनी-अपनी परंपरा के अनुसार यह त्योहार मनाएंगे। गुरुग्राम में रहने वाले बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल और ओडिशा के लोग ज्ञान और कला की देवी सरस्वती की पूजा करेंगे। सामूहिक रूप से करीब 40 जगहों पर छोटे बड़े पूजा पंडालों में सरस्वती पूजा आयोजित की जा रही है।
सेक्टर-31 स्थित जलवायु विहार सामुदायिक भवन, डीएलएफ फेज वन सामुदायिक भवन, सेक्टर-41 शक्तिपीठ मंदिर, सेक्टर-109 स्थित पीतांबरा सूर्य नारायण मंदिर, सेक्टर-नौए स्थित गौरी शंकर मंदिर, सुशांतलोक वन कम्यूनिटी सेंटर, राजेंद्रा पार्क, शीतला कॉलोनी आदि जगहों पर मां सरस्वती की पूजा की जाएगी। इसके अलावा लोग मंदिरों व घरों में ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा करेंगे।
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नवस्फूर्ति का त्योहार है बसंत पंचमी
हरियाणवी परंपराओं में बसंत पंचमी पर पीले मीठे चावल के पकवान बनाने और पीले कपड़े पहनने की परंपरा है। शिक्षाविद् डाॅ. अशोक दिवाकर बताते हैं कि यह नवस्फूर्ति का त्योहार है। खेतों में पीली सरसों खिली होती है। हरियाणवी परिवारों में पीले वस्त्र पहनने, पीले फूल से भगवान की पूजा का रिवाज रहा है।

गेंदे के फूलों से बसंतमय हुआ बाजार
बसंत पंचमी पर घरों और मंदिरों में सजाने और पूजन के लिए पीले, सफेद फूलों का प्रयोग होता है। गुरुग्राम के फूल बाजार में काफी मात्रा में गेंदे, गुलदाउदी और देशी गुलाब के फूल लाए गए हैं। सेक्टर-5 फूल बाजार के विक्रेता सचिन ने बताया पीले फूलों की मांग बवसंत पंचमी पर काफी होती है। बाजार में गुलाब की पंखुड़ियों की कीमत 250 से 300 रुपये प्रति किलो, गेंदे की कीमत 150 रुपये प्रति किलो और सफेद गुलदाउदी के फूलों की कीमत 200 रुपये प्रति किलो है।
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निर्धन परिवारों की बेटियों का ब्याह
बसंत पंचमी के मौके पर न्यू कॉलोनी स्थित गीता भवन मंदिर में निर्धन परिवारों की 11 बेटियों का विवाह समारोह संपन्न होगा। गीता भवन मंदिर के संस्थापक और सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष सुरेंद्र खुल्लर ने बताया कि पिछले 25 सालों से मंदिर की ओर से यह परंपरा चली आ रही है। बसंत पंचमी पर जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के हाथ पीले कराए जाते हैं। पंजाबी बिरादरी और मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोग अपने-अपने सामर्थ्य के अनुसार इसमें योगदान देते हैं।
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