दोनों पुराने एसटीपी की क्षमता बढ़ाने के साथ शोधित पानी की गुणवत्ता बेहतर होगी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। यमुना एक्शन प्लान के तहत घरेलू और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी को 100 फीसदी शोधित करने की योजना पर गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) काम कर रहा है। इसके लिए तीन नए एसटीपी और एक औद्योगिक गंदे पानी के शोधन के लिए संयंत्र लगाने जा रहा है।
पुराने धनवापुर और बेहरामपुर संयंत्र के शोधित पानी की गुणवत्ता बेहतर की जाएगी। साइबर सिटी में सीवर के पानी को शोधित करने के लिए पर्याप्त सीवर शोधन संयंत्र नहीं हैं। ऐसे में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण नए संयंत्र लगवाने के साथ पुराने की भी क्षमता को बढ़ा रहा है। धनवापुर एसटीपी की क्षमता 218 एमएलडी है, जबकि बेहरामपुर एसटीपी की क्षमता 170 एमएलडी है। दोनों संयंत्रों से रोज 388 एमएलडी गंदे पानी को शोधित किया जा रहा है। जीएमडीए की योजना है कि दोनों संयंत्रों की क्षमता को और बढ़ाया जाए ताकि ज्यादा गंदे पानी को शोधित किया जा सके। योजना के अनुसार बेहरामपुर में 120 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और धनवापुर में 100 एमएलडी एसटीपी के उन्नयन की परियोजना पर 50.58 करोड़ और 75.46 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत है। इसकी सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और काम शुरू होना है। साथ ही दोनों प्लांट से शोधित पानी की गुणवत्ता भी बेहतर की जानी है। सेक्टर-76 से 80 के लिए सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) का निर्माण होना है। जीएमडीए ने गांव नौरंगपुर में 3.75 एकड़ जमीन मांगी थी लेकिन सेक्टर 80 में 2.96 एकड़ पर पर सहमति बनी है।
शोधित पानी की गुणवत्ता होगी बेहतर
बेहरामपुर में 120 एमएलडी का एसटीपी संचालित किया जा रहा है। अभी संयंत्र से 30 एमएलडी पानी का दूसरे और तीसरे स्तर तक शोधित किया जाता है। जीएमडीए की योजना है कि बचे 90 एमएलडी पानी की गुणवत्ता को बेहतर किया जाए। धनवापुर में मौजूदा 100 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का अपग्रेडेशन होगा। 75 एमएलडी क्षमता वाले तृतीयक उपचार संयंत्र लगेगा। एसटीपी के पानी को शोधित कर इंडस्ट्री को उपलब्ध कराने के साथ निर्माण कार्य के लिए दिया जा रहा है। यदि पानी ड्रेनेज में छोड़ा जाएगा तो यमुना दूषित नहीं होगी। जीएमडीए के मुख्य अभियंता आरके जांगड़ा ने बताया कि शहर में सीवर के गंदे पानी शोधन के लिए नए संयंत्र लगाने और पुराने की क्षमता बढ़ाने की योजना है।
मानेसर में 25 एमएलडी के एसटीपी का निर्माण लगभग पूरा
सेक्टर-107 में दो चरणों में 100-100 एमएलडी के दो एसटीपी के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सेक्टर 81 से 115 के सीवेज का शोधन होगा। पहले 100 एमएलडी के संयंत्र का डीपीआर और डीएनआईटी तैयार करने का काम एक एजेंसी को दिया गया है। मानेसर में 25 एमएलडी के एसटीपी का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। संयंत्र से मास्टर सीवर लाइन जोड़ने का काम किया जाना है। इसके बाद मानेसर क्षेत्र के गांवों व सेक्टरों के पानी का शोधन शुरू हो जाएगा। औद्योगिक इकाइयों के गंदे पानी को शोधित करने के लिए सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) बनाने की तैयारी है। 20 एमएलडी का संयंत्र सेक्टर-34 (खाड़सा गांव) में तैयार किया जाएगा। सीवर के पानी की बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीडेशन डिमांड) आमतौर पर 300 तक होती है। गंदे पानी को शोधित कर 10 तक लाना होता है। इसके बाद पानी को नाले में डाल दिया जाता है।