आरोपियों की पहचान नागालैंड के दीमारपुर निवासी कर्मा (32), हिमाचल प्रदेश के मंडी निवासी लोबसांग त्सुलटिम (33) व हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला निवासी न्गावांग ग्यालत्सेन (35) के रूप में हुई है। कर्मा व लोबसांग त्सुलटिम को 14 फरवरी को और न्गावांग ग्यालत्सेन को 16 फरवरी को दिल्ली के मंजनू का टीला के पास से दिल्ली से काठमांडू जाने वाली बसों से गिरफ्तार किया। तीनों आरोपी भारत से नेपाल भागने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश करके तीन दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की।
पुलिस द्वारा पूछताछ में कर्मा व लोबसांग त्सुलटिम ने बताया कि उन्होंने अपने साथी न्गावांग ग्यालत्सेन के साथ मिलकर चाइना मूल के व्यक्ति त्सेगा के कहने पर उन्होंने वर्चुअल सिम बॉक्स गुरुग्राम में लगवाए थे। साइबर पुलिस द्वारा आरोपियों से बरामद सिम बॉक्स को चीनी के साइबर ठगों द्वारा रि-इंजीनियर्ड किया गया है।
इस बॉक्स में 20 रेडमी मोबाइल लगे हुए हैं। चाइना एप के माध्यम से साइबर ठगी के लिए एक दिन में 20 हजार से ज्यादा कॉल करने में सक्षम हैं। इस बॉक्स के चाइना नागरिक त्सेगा भारतीय लोगों के पास गेमिंग, निवेश फ्रॉड सहित अन्य साइबर फ्रॉड की कॉल वीडीएमएस एपीके एप के माध्यम से करवाता था।
चीन में जन्में दो आरोपी, 15 वर्षों से भारत में रह रहे
पुलिस द्वारा आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि लोबसांग त्सुलटिम व न्गावांग ग्यालत्सेन चीन में जन्में थे। वे पिछले 15 वर्षों से भारत में शरणार्थी के तौर पर रह रहे हैं। दोनों को चीन व ताइवानी भाषाओं का ज्ञान है। दोनों आरोपी चाइना नागरिक त्सेगा से वीचैट एप के माध्यम से जुड़े हुए हैं, जोकि भारत में वर्ष 2020 से प्रतिबंधित है।
तीनों आरोपियों को रिमांड पूरा होने के बाद अदालत में पेश करके न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। मामले में अन्य संलिप्त लोगों के बारे में छानबीन की जा रही है। जिले की पुलिस द्वारा साइबर ठगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। लोगों को भी साइबर ठगी से बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। - प्रियांशु दीवान, एसीपी (साइबर अपराध), गुरुग्राम।