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Gurugram News: मंदिर में नमक और झाडू चढ़ाने की है अनूठी परंपरा, लाखों श्रद्धालु पहुंचे

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800 साल पुराने प्राचीन बाबा बिसाह भक्त पूर्णमल मंदिर में लगता है श्रद्धालुओं का ताता
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शिवम राजपूत

मानेसर। कासन गांव के प्राचीन बाबा बिसाह भक्त पूर्णमल मंदिर में इस साल भी वार्षिक मेला तीन दिनों तक चला। ग्रामीणों की आस्था का सबसे बड़ा आयोजन माने जाने वाले इस मेले में पूरे राज्य से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। आयोजकों के मुताबिक, इस मेले में तीन दिनों में 10 लाख से अधिक लोगों दर्शन करने आते है। धार्मिक आस्था के साथ ही यहां की एक विशेष लोक परंपरा भी चर्चा में रहती है। इस मंदिर में कई श्रद्धालु नमक और झाडू मंदिर में चढ़ाते हैं।
इस मेले की जड़े सदियों पुरानी बताई जाती हैं। यहां पर परंपरागत रूप से हर साल तीन दिन तक मेला लगता है। मेले की शुरुआत परंपरागत ध्वज चढ़ाने की रस्म से शुरू हुई। पहले दिन गांव और आसपास के श्रद्धालु घर-घर से ध्वज लेकर पैदल मंदिर पहुंचे और ध्वजा रोहण के साथ विधिवत मेले का शुभारंभ किया। हर साल की तरह, इस साल भी अखाड़ों की रौनक भी बनी रही और परंपरा के अनुसार तीन दिनों तक कुश्ती दंगल आयोजित किए गए, जिसमें दूर-दूर से पहलवानों ने शिरकत की।
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धार्मिक आस्था के साथ ही यहां की एक विशेष लोक परंपरा भी चर्चा में रहती है। कई श्रद्धालु नमक और झाडू मंदिर में चढ़ाते हैं। पहाड़ी पर बसे मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर पुलिस कर्मियों ने कतारें संभाली, जबकि भंडारे की सेवा तीनों दिन चलती रहीं। यहां आस्था और अनुशासन साथ-साथ दिखाई देता है, जो इस मेले की पुरानी पहचान रही है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि यह मेला पीढ़ियों से चला आ रहा है। यह मंदिर सिर्फ कासन की ही नहीं बल्कि पूरे गुरुग्राम क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। मंदिर परिसर में बाबा चौरंगीनाथ के साथ शिवालय और शनिदेव के मंदिर भी है। जहां पर सावन और भाद्रपद में विशेष भीड़ रहती है।
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