गुरुग्राम। गुरुग्राम और नूंह में बनने वाली दुनिया की सबसे बड़ी अरावली जंगल सफारी के अगले महीने रूप लेने की उम्मीद है। 10 हजार एकड़ में बन रही इस सफारी को लेकर सर्वे का काम हो चुका है। पर्यटन विभाग ने इसकी डिजाइन और लेआउट के लिए दो कंपनियों को काम सौंप दिया है। इसके प्रारूप डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट और डिजाइन की रूपरेखा के लिए एक महीने का समय दिया गया है। डीपीआर आने के बाद इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
इस प्रोजेक्ट के आने के बाद 15 वर्ग किमी का एक तेंदुआ पार्क के प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार की गई है, जो गुरुग्राम और सोहना के वन क्षेत्र में बननी है। अरावली जंगल सफारी को कई चरणों में बनना है। इसका पहला चरण दो वर्षों में पूरा किया जाना है। इसमें पर्यटन विभाग, वन विभाग, वन्य जीव विभाग, चिड़ियाघर प्राधिकरण आदि सब मिलकर काम करेंगे। अभी तक इसकी जो रूपरेखा सामने आई है, इसमें जंगल सफारी के सात हिस्से होंगे। इसमें शाकाहारी वन्य जीव, बिल्ली प्रजाति के तेंदुआ आदि वन्य जीव विदेशी वन्य जीवों, पक्षी उद़्यान, प्राकृतिक ट्रेल, मनोरंजन स्थल और बॉयो होम्स आदि हिस्से बनाए जाने हैं। पर्यटन विभाग के प्रबंध निदेशक नीरज चड्ढा ने बताया कि यह तय किया जाना है कि चिड़ियाघर अथॉरिटी यह बताएगी कि कौन-कौन से विदेशी जीव लाए जाने हैं और वे यहां की प्रकृति में ढल पाएंगे या नहीं।
तेंदुआ बहुल इलाकों का कराया सर्वेक्षण
वन्य जीव विभाग ने पिछले दिनों वन्य जीव संस्थान से अरावली के जीव जंतुओं का सर्वेक्षण कराया है। अतिरिक्त मुख्य वन संरक्षक महेंद्र सिंह मलिक ने बताया कि इसमें अरावली में कितने तेंदुए हैं, यह तो नहीं पता चला है मगर किन इलाकों में तेंदुए ज्यादा हैं, उन हिस्सों की रिपोर्ट तैयार की गई है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनने के बाद वन्य जीव विभाग की भूमिका इसमें शुरू होगी। अरावली में बंधवाड़ी से सोहना के दमदमा तक के जंगलों में करीब 15 किमी में तेंदुआ पार्क बनाकर तेंदुओं के संरक्षण की योजना भी सरकार की है। जिला वन अधिकारी राजीव तेजयान के अनुसार, 18वीं सदी में अरावली के जंगलों में शेर भी पाए जाने की जानकारियां मिलती हैं। इसका मतलब है कि इन इलाकों में ये वन्यजीव रह सकते हैं।
इन गांवों की जमीन पर बनेगा अरावली सफारी
जिन गांवों की जमीन ली जानी है उसमें गुरुग्राम के सकतपुर गैरतपुर वास, शिकोहपुर, भोंडसी, घामडौज, अलीपुर टिकली, अकलीमपुर, नौरंगपुर बड़गुजर शामिल हैं। इसी प्रकार नूंह जनपद के कोटा, खंडेवला, गंगानी, मोहम्मदपुर अहीर, खरक, जलालपुर, भांगो, चलका गांव इस परियोजना में शामिल हैं। इसमें 6000 एकड़ गुरुग्राम और 4000 एकड़ नूंह की जमीन जानी है।
इन पर है जंगल सफारी का दारोमदार
अरावली जंगल सफारी की डिजाइन ले-आउट और कंसल्टेंसी की जिम्मेदारी टैगबिन और लॉजिक जू नाम की दो कंपनियों पर है। डिजाइन और डीपीआर ये कंपनियां तैयार कर रही हैं, जबकि लॉजिक जू वन्य जीवों के संबंध में सलाह देने वाली विदेशी कंपनी है। इसके अलावा देश के चिड़ियाघर प्राधिकरण इसमें अपनी सहायता देंगे। कौन-कौन से वन्य जीव रखे जाएंगे, कौन-कौन से विदेशी जीव जंतु लाए जाएंगे, भारतीय चिड़ियाघर प्राधिकरण तय करेगा। अरावली सफारी की डिजाइन और ले-आउट तैयार करने वाली कंपनी टैगबिन तकनीकी सहायता देने वाली एक विशेषज्ञ कंपनी है, जो इस प्रोजेक्ट में कंसल्टेंसी दे रही है।
वर्जन
कोशिश है कि एक महीने में अरावली जंगल सफारी का डीपीआर और डिजाइन तैयार हो जाए। कागजी कार्रवाई के बाद जमीनी स्तर पर इस पर कार्य होंगे। इसके कितने हिस्से होंगे, इसमें तेंदुआ पार्क जोड़ा जाएगा या नहीं, यह सब डीपीआर और डिजाइन तय होने के बाद पता चलेगा। एक विदेशी और एक अपने देश की कंपनी मिलकर इसका डिजाइन तैयार कर रही है। - नीरज चड्ढा, एमडी पर्यटन विभाग