आयोग ने कहा-सुरक्षा में लापरवाही का आरोप नहीं होता साबित
11.60 लाख ब्याज के साथ देने का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। चोरी हुए ट्रक की सुरक्षा में लापरवाही बरतने और गलत तथ्य देने पर खारिज किया गया क्लेम बीमा कंपनी को ब्याज समेत देना होगा। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने कहा ट्रक को एक निर्धारित पार्किंग स्थल पर खड़ा किया गया था। इसलिए वाहन की सुरक्षा में लापरवाही का आरोप भी साबित नहीं होता है। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को 11.60 लाख रुपये 27 सितंबर 2021 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज से दें। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी होने पर 50 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 22 हजार रुपये देने का आदेश दिया।
झज्जर के जिला बहादुरगढ़ के सोल्हा गांव निवासी ओम प्रकाश ने याचिका में बताया कि वह गगन लॉजिस्टिक्स के मालिक हैं। उन्होंने अपने ट्रक का रॉयल सुंदरम इंश्योरेंस कंपनी से 11.60 लाख रुपये के बीमित मूल्य पर बीमा कराया था। बीमा पॉलिसी 25 अक्तूबर 2017 से 24 अक्तूबर 2018 तक वैध थी। 20 अक्तूबर 2018 को चालक दिनेश यादव ने ट्रक को खेड़कीदौला स्थित गुजरात हाईवे कैरियर की पार्किंग में खड़ा किया था। 22 अक्तूबर को ओम प्रकाश वहां पहुंचे तो ट्रक गायब मिला। उन्होंने उसी दिन खेड़कीदौला थाने में चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराई और बीमा कंपनी को भी सूचना दी। पुलिस ने जांच के बाद मामले में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर दी।
ट्रक की दोनों चाबियां 6 मार्च 2018 को ही गुम हो गई थीं, जिसकी सूचना उन्होंने पुलिस को दे दी थी। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने 17 दिसंबर 2019 को पत्र जारी कर चाबियों से संबंधित तथ्यों में गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी ने चोरी की सूचना देने में देरी और वाहन की सुरक्षा में लापरवाही को भी आधार बनाया। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि 2018 में ही पुलिस को दे दी थी। आयोग ने कंपनी को बीमा का पैसा देने का आदेश सुनाया।