किडनी कांड: 11 महीने में पांच सौ से अधिक एनओसी हुईं जारी, कमेटी में चार डॉक्टर व दो समाजसेवी हैं शामिल
फोर्टिस के दूसरे समन्वयक ने कबूला अपना जुर्म, जेल भेजा
मयंक तिवारी
गुरुग्राम। जयपुर किडनी प्रत्यारोपण की चल रही विभागीय जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि साल भर पहले अंग प्रत्यारोपण की एनओसी देने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का गठन हुआ था। इसमें चार डॉक्टर और दो समाजसेवी शामिल हैं। इनकी ओर से एक भी बैठक का आयोजन नहीं हुआ है। जबकि पांच सौ से अधिक एनओसी जारी कर दी गईं। इसके साथ ही एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने रिमांड पर चल रहे जयपुर फोर्टिस के दूसरे समन्वयक को अदालत में पेश किया। जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
किडनी प्रत्यारोपण के मामले में चल रही विभागीय जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि अंग प्रत्यारोपण के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का गठन अप्रैल 2023 में हुआ था। नियम के अनुसार हर माह एक बैठक आवश्यक है। इसमें आने वाले आवेदनों को सुना जाता है। अंगदान करने वालों के खून के रिश्ते की जांच के साथ ही अंग लेने व देने वालों की वीडियो रिकार्डिंग की जाती है। कमेटी आवश्यकतानुसार इस बैठक का आयोजन जल्दी भी कर सकती है। कमेटी गठित होने के बाद एक भी बैठक नहीं हुई है। बैठक तो दूर की बाद व्हाट्सएप पर डोनर का फोटो मंगवा कर एनओसी जारी की गई हैं।
विभागीय अधिकारी की संलिप्तता की चल रही जांच
किडनी प्रत्यारोपण की अनुमति के मामले में स्वास्थ्य विभाग का कौन-कौन अधिकारी शामिल है। इसकी जांच चल रही है। बैठक क्यों नहीं हुई, इस पर कमेटी के लोगों के अलग-अलग बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके पहले की कमेटी के काम का तरीका देखा जा रहा है।
अस्पताल प्रबंधन ने अब तक नहीं दिए एसीबी को कागजात
एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से सर्जरी करने वाले डाक्टर व अस्पताल प्रबंधन के लोगों से हुई पूछताछ के बाद उनके और एजेंटों के बीच हुए करार की कॉपी मांगी गई है। साथ ही जिन डॉक्टरों ने सर्जरी की हैं, उनका अस्पताल के साथ क्या पैकेज है। इसके बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से कागजात उपलब्ध कराने का सोमवार को आखिरी दिन था। अब एसीबी की ओर से अगले एक्शन का इंतजार है।
वर्जन
एसीबी की ओर से पूछताछ के बाद जयपुर फोर्टिस के दूसरे समन्वयक गिरीराज शर्मा को अदालत में पेश किया गया। जहां पर अदालत ने उसे जेल भेज दिया है। एसीबी को अस्पताल प्रबंधन से मिलने वाले कागजात का इंतजार है। जिसके बाद जांच आगे बढ़ेगी।
- भूपेन्द्र कुमार, एडिशन एसपी, एसीबी, जयपुर।