गुरुग्राम। क्लेम देने के बाद बीमा कंपनी द्वारा कबाड़ में बेची जाने वाली पूर्ण क्षतिग्रस्त (टोटल लॉस) गाड़ियों के नंबर का प्रयोग कर दिल्ली एनसीआर से गाड़ी नगालैंड पहुंचाई जाती थी। एसीपी (अपराध-1) प्रीतपाल ने बताया कि बीमा कंपनी पूर्ण क्षतिग्रस्त गाड़ी को कबाड़ में बेचने के साथ ही गाड़ी के सभी हक भी कबाड़ी को ही बेच देती है। इसका फायदा यह लोग उठाते हैं और क्षतिग्रस्त गाड़ी से इंजन व चेसिस नंबर की प्लेट उतार लेते थे। कबाड़ी से गाड़ी की आरसी लेकर उसके आधार पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनवा लेते थे। इसी नंबर प्लेट के आधार पर ही गाड़ी को नगालैंड भेजा जाता था। एसीपी ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नगालैंड जाने के दौरान रास्ते में दिल्ली-एनसीआर का नंबर देखकर पुलिस गाड़ी को संदिग्ध मानती है और पकड़े जाने का डर रहता है। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर नंबर की गाड़ी के लूट होने का खतरा अधिक रहता है।
एसटीएफ ने भी पकड़ी थी फर्जी रजिस्ट्रेशन की गाड़ियां
एसीपी ने बताया कि करीब एक साल पहले स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गाड़ियों के फर्जी रजिस्ट्रेशन का मामला उजागर किया था। इसमें दादरी नंबर की गाड़ियां मिली थी जिनका आरटीए में कोई रिकॉर्ड नहीं था। इस मामले में भी आरोपियों ने संलिप्तता बताई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने डीएलएफ फेज-3, सेक्टर-14, सेक्टर-40, सेक्टर-18 गुरुग्राम समेत रोहतक, दादरी, महम और तावडू में 9 वाहनों की वारदात का खुलासा कर चुके हैं। पूछताछ में आरोपियों ने 100 से अधिक वारदात को अंजाम देना बताया है। आरोपियों के कब्जे से 2 नंबर प्लेट्स, 1 टैब, 3 सॉकेट, 1 लीड, 1 मास्टर चाभी, 1 प्लेट इस्ट्रूमेंट बरामद किया है।
दिल्ली एनसीआर में भी बेच चुके हैं गाड़ी
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह 50 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर समेत इंजन व चेसिस नंबर की प्लेट बदलकर गुरुग्राम, दिल्ली, फरीदाबाद, राजस्थान समेत हरियाणा के अन्य जिलों में बेच चुके हैं। आरोपियों के पास से पुलिस ने अरुणाचल प्रदेश के रजिस्ट्रेेशन नंबर की नंबर प्लेट भी बरामद की हैं।