यूपी-बिहार जाने वाले यात्रियों की जेब पर बढ़ा बोझ, एक हजार का टिकट दो हजार रुपये तक पहुंचा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। त्योहारों पर घर लौटने की बेताबी और मजबूरी का निजी बस संचालकों द्वारा सरेआम सौदा किया जा रहा है। दिवाली पर अपनों से मिलने की चाह में गुरुग्राम से उत्तर प्रदेश व बिहार जाने वाले लाखों प्रवासियों के लिए यह सफर एक कठिन इम्तिहान बन गया है। रेलवे में महीनों पहले फुल हो चुकी सीटें और निजी बसों का आसमान छूता दोगुना-तिगुना किराया इन कामगारों के बजट पर भारी पड़ रहा है। सामान्य दिनों में जिस सफर के लिए यात्रियों को एक हजार रुपये खर्च करने पड़ते थे, अब उसी के लिए दो हजार रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। महंगे किराये के बावजूद बसों में सीटें मिलना मुश्किल हो रहा है। इससे नौकरीपेशा लोगों और श्रमिकों की परेशानी बढ़ गई है।
किराया बिगाड़ रहा बजट
दिवाली पर परिवार के साथ गोरखपुर जाना है। पहले एक हजार रुपये में टिकट मिल जाता था, लेकिन अब दो हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। - सुबोध शर्मा, यात्री
बिहार जाने वाली ट्रेनों में सीट नहीं मिल रही है। निजी बसों का किराया भी काफी बढ़ गया है। त्योहार पर घर जाना जरूरी है, इसलिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे। सुरेश - यात्री
पूरे साल परिवार से दूर रहकर काम करते हैं। दिवाली पर पटना जाने की तैयारी की थी, लेकिन अचानक बढ़े किराये से बजट बिगड़ गया है। - शत्रुघ्न - यात्री
बरेली में घर है हमारा, हम चार लोग हैं जाने वाले। बस बाले आठ हजार रुपये किराया मांग रहे हैं। आम दिनों में केवल 1000 रुपये लगते हैं। - रवि, यात्री
रवि। बस वाली खबर के लिए
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