व्यापारी बोले, मांग खत्म होने के कारण कार्ड बेचना कर दिया बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
पटौदी। डिजिटलाइजेशन के बढ़ते प्रभाव ने पारंपरिक ग्रीटिंग कार्ड के युग को लगभग समाप्त कर दिया है। सभी जगह अब सोशल मीडिया का बोलबाला है। एक समय था जब दिसंबर आते ही स्टेशनरी की दुकानें नए साल के रंग-बिरंगे ग्रीटिंग कार्ड्स से सज जाती थीं और व्यापारियों को भारी मुनाफा होता था।
आज स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के दौर में लोग ऑनलाइन पोस्टर, मैसेज और फोटो के जरिए बधाई देना अधिक पसंद करते हैं। स्टेशनरी विक्रेता भीम अग्रवाल बताते हैं कि मांग खत्म होने के कारण उन्होंने कार्ड बेचना बंद कर दिया है। लोग अब गूगल या विभिन्न मोबाइल ऐप्स का उपयोग कर घर बैठे ही मुफ्त में आकर्षक बधाई संदेश तैयार कर लेते हैं।
जोगेश्वर कुमार और जीत कुमार जैसे स्थानीय निवासियों का मानना है कि ऑनलाइन माध्यम भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे आसान और त्वरित तरीका बन गया है। जहां पहले कार्ड खरीदने और डाक से भेजने में समय और पैसा खर्च होता था, अब इंटरनेट ने इसे सुलभ बना दिया है। इस तकनीकी बदलाव ने न केवल बाजार का स्वरूप बदल दिया है, बल्कि ग्रीटिंग कार्ड भेजने की उस पुरानी परंपरा को भी इतिहास का हिस्सा बना दिया है जो कभी रिश्तों में मिठास घोलने का मुख्य जरिया थी।