-कार्य में बाधा बनी वन विभाग के लिए जमीन देने की समस्या हुई दूर, 18 साल बाद जगी उम्मीद
दिनेश देशवाल
नूंह। मेवात क्षेत्र की वर्षों पुरानी और बहुप्रतीक्षित नूंह-पलवल फोरलेन सड़क परियोजना अब आखिरकार धरातल पर उतरती नजर आ रही है। करीब 18 साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पहले कार्यकाल में इस सड़क को फोरलेन बनाने की घोषणा की गई थी, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों के चलते यह योजना लंबे समय तक फाइलों में ही उलझी रही। कई बार बजट स्वीकृत होने के बावजूद काम शुरू नहीं होने से लोगों की उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी थीं। अब जमीन अधिग्रहण की सबसे बड़ी बाधा दूर होने के बाद इलाके के लोगों में एक बार फिर उम्मीद की नई किरण जगी है।
नूंह और पलवल जिला मुख्यालयों को जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग वर्तमान में मात्र 18 फीट चौड़ा है। करीब 30 किलोमीटर लंबे इस रास्ते पर मंडकोला कस्बे सहित लगभग डेढ़ दर्जन गांव सीधे बसे हुए हैं, जबकि दो दर्जन से अधिक गांवों के लिए यह मुख्य संपर्क मार्ग है। सड़क की चौड़ाई कम होने और लगातार बढ़ते ट्रैफिक के कारण यहां आए दिन सड़क हादसे होते रहते हैं। स्थानीय लोग लंबे समय से इस सड़क को चौड़ा करने की मांग उठा रहे थे। इसी मांग को देखते हुए तत्कालीन हुड्डा सरकार ने इसे स्टेट हाईवे घोषित करते हुए फोरलेन बनाने की घोषणा की थी।
हालांकि परियोजना की राह में सबसे बड़ी बाधा जमीन अधिग्रहण और वन विभाग से जुड़ी औपचारिकताएं बनी हुई थीं। सरकार द्वारा सड़क चौड़ीकरण के लिए 137 करोड़ रुपये तथा भूमि अधिग्रहण के लिए 25 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया था। लेकिन सड़क किनारे खड़े पेड़ों की कटाई के बदले वन विभाग को करीब 65 एकड़ जमीन उपलब्ध करानी थी। यही प्रक्रिया वर्षों तक पूरी नहीं हो सकी और परियोजना अधर में लटकी रही।
65 एकड़ भूमि किसानों से खरीदी :
कोटला, आकेड़ा और मोहम्मदपुर गांवों के किसानों से सर्कल रेट पर करीब 65 एकड़ जमीन खरीदी जा चुकी है। इन जमीनों की रजिस्ट्री पीडब्ल्यूडी विभाग के नाम करवाने की प्रक्रिया जारी है। इसके बाद यह जमीन वन विभाग को हस्तांतरित की जाएगी, जिससे पेड़ों की कटाई और अन्य जरूरी मंजूरियों का रास्ता साफ हो जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कर निर्माण कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।
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सड़क हादसों में आएगी कमी :
इलाके के लोगों का मानना है कि इस सड़क के फोरलेन बनने से न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी बल्कि क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलेगी। इंदरी निवासी रंजीत नंबरदार का कहना है कि फोरलेन बनने से लोगों का सफर आसान और सुरक्षित होगा तथा दोनों जिला मुख्यालयों तक पहुंचने में काफी सुविधा मिलेगी। वहीं किरा गांव के सरपंच समय सिंह का कहना है कि इस सड़क के बनने से इलाके में उद्योग-धंधों को बढ़ावा मिलेगा और आने वाले समय में यह रोड क्षेत्र की तस्वीर बदलने का काम करेगी। कालियाका के बीरपाल नंबरदार ने कहा कि यह मांग लंबे समय से लंबित थी और अब सरकार द्वारा इसे पूरा किया जाना क्षेत्र के लिए बड़ी राहत साबित होगा। उन्होंने कहा कि इससे दो दर्जन से अधिक गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता नत्थूराम गुर्जर ने बताया कि इस सड़क के लिए युवाओं ने लंबे समय तक संघर्ष किया था। मिंडकोला से पलवल तक करीब 15 किलोमीटर का पैदल मार्च निकालकर लोगों ने अपनी आवाज बुलंद की थी।
परियोजना में आ रही सबसे बड़ी बाधा अब दूर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जमीन की रजिस्ट्रियां करवाई जा रही हैं और वन विभाग से मंजूरी मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार अब इस सड़क का निर्माण कार्य बहुत जल्द शुरू होने की संभावना है।
सचिन कुमार, कार्यकारी अभियंता, एचएसआरडीसी फरीदाबाद