अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। उपभोक्ता के एक ही बिजली कनेक्शन पर बिजली निगम द्वारा चोरी का आरोप लगाते हुए 2 बार जुर्माना लगाए जाने को सिविल जज रश्मीत कौर की अदालत ने नियमों के खिलाफ बताते हुए उपभोक्ता को राहत दी है। हेलीमंडी निवासी सुरेंद्र के अधिवक्ता क्षितिज मेहता के अनुसार 28 अप्रैल 2020 को बिजली निगम ने उपभोक्ता के खिलाफ बिजली चोरी का केस बनाते हुए 34508 रुपये का जुर्माना लगा दिया था। जिसे उपभोक्ता ने 2 जुलाई 2020 को बिजली निगम में जमा करा दिया था। अधिवक्ता का कहना है कि 20 जनवरी 2022 को बिजली निगम ने उपभोक्ता को एक नोटिस भेजकर 37906 रुपये की बिजली चोरी की बाबत जमा कराने का नोटिस दिया। जिसमें बताया गया था कि पहले यानि 28 अप्रैल 2020 को बिजली चोरी के मामले में जो जुर्माना लगाया गया था, वह कम था। इसलिए इस राशि का भुगतान भी उपभोक्ता करे। अधिवक्ता का कहना है कि उपभोक्ता ने 3 फरवरी 2022 को बिजली निगम के खिलाफ अदालत में मामला दायर कर दिया। तत्कालीन सिविल जज विनय काकरान की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए 8 फरवरी 2022 को बिजली निगम को आदेश दिए कि उपभोक्ता का कनेक्शन नहीं काटा जाए और 37906 रुपये की जुर्माना राशि पर भी स्टे लगा दिया था। इस मामले की सुनवाई अदालत में चली। सिविल जज रश्मीत कौर की अदालत ने दोनों पक्षों के प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के आधार पर बिजली निगम द्वारा दोबारा से मांगी गई 37 हजार 906 की जुर्माना राशि को गलत करार दिया है।