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सरकारी स्तर पर व्यवस्थाएं नाकाफी, डेंगू मरीजों की संख्या हुई 73

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गुरुग्राम। बीमारियों के मौसम में सरकारी स्तर पर नाकाफी स्वास्थ्य सेवाएं लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही हैं। डेंगू और सामान्य बुखार के मरीजों के साथ त्वचा रोग के मरीज हर रोज बढ़ रहे हैं। मंगलवार को डेंगू मरीजों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है। सोमवार को यह आंकड़ा 68 था। मंगलवार को पांच और नए मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई।
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इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल में आने वाले मरीजों की जांच बढ़ा दी है। पहले जहां प्रतिदिन 600 मरीजों की जांच की जा रही थी, अब यह आंकड़ा 1300 के करीब पहुंच गया है। इससे साफ जाहिर है कि अस्पताल में होने वाली ओपीडी की संख्या भी दुगने से ज्यादा हो गई है। बढ़ते मरीजों की संख्या के बीच अस्पताल की मौजूद व्यवस्थाएं कम पड़ने लगी है। 30 बेड का बनाया गया डेंगू वार्ड ही मरीजों की संख्या के आगे छोटा पड़ गया है। मजबूरी में मरीजों को दूसरे वार्ड या प्राइवेट अस्पताल के लिए रेफर किया जा रहा है।
दवाओं के लिए आधा किलोमीटर लंबी लाइन :
मरीजों को सबसे अधिक परेशानी दवाइयों की कमी के कारण हो रही है। यहां मरीजों की भीड़ के बाद भी अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई विशेष इंतजाम नहीं किए गए बल्कि जो इंतजाम आम दिनों में रहते हैं, उन्हें भी कम कर दिया गया है। दवाइयों ने सरकारी अस्पताल में महिला-पुरुषों के लिए दो-दो काउंटर बनाए गए हैं। लेकिन मंगलवार को केवल दो ही काउंटरों से मरीजों को दवाइयां दी जा रही थी। दवाइयों के लिए मरीज आधा किलोमीटर तक लंबी लाइन लाएग अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
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जब एक या डेढ घंटे बाद मरीज का दवाई लेने का नंबर आता तो उसे आधी अधूरी दवा देकर भेज दिया जा रहा था। जिससे मरीजों के चेहरों पर मायूसी देखने को मिली। इस बारे में अस्पताल के कार्यकारी पीएमओ डॉ. उमेश मेहता ने कहा कि दवा स्टोर प्रभारी सीमा इस बारे में ज्यादा बेहतर बता पाएंगी। उन्हें इसकी सटीक और सही जानकारी नहीं है कि अस्पताल में कौन सी दवाईयां हैं, कौन सी नहीं। दवाईयों की कमी को लेकर उन्होंने क्या कार्रवाई की है, इसके बारे में सीमा ही बता पाएंगी। स्टोर प्रभारी सीमा से जब संपर्क करने पहुंचे तो उनके कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। बार-बार आग्रह के बाद भी उन्होंने या किसी साथी कर्मचारी ने दरवाजा नहीं खोला।
पूरी मैनपावर के बाद भी दो काउंटर खोले
आम दिनों में दवा के लिए चार काउंटर खुले रहते हैं। लेकिन मरीजों की भीड़ बढ़ने के बाद काउंटर बढ़ाने की बजाय यहां आधे कर दिए गए। मंगलवार को एक काउंटर पर महिला और एक काउंटर पर पुरुष मरीजों को दवाई दी जा रही थी। जबकि अंदर करीब 10 से 15 कर्मचारी आराम से खड़े थे। महज दो कर्मचारी ही इन दोनों काउंटरों पर मरीजों को दवा देते रहे।
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