-धर्मगुरु मौलाना साद ने कराई सामूहिक दुआ, जलसे में देशभर के दस लाख लोग हुए शामिल
-लाखों लोगों की भीड़ के कारण लगा भीषण जाम
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह जिले के अड़बर गांव में 4 से 6 अप्रैल तक चले विशाल इस्लामिक तब्लीगी जलसे का सोमवार को शांतिपूर्ण समापन हो गया। समापन अवसर पर प्रसिद्ध धर्मगुरु मौलाना साद ने लाखों लोगों के साथ अमन, शांति और देश की खुशहाली के लिए सामूहिक दुआ कराई। अपनी तकरीर में उन्होंने लोगों को आपसी भाईचारे, इंसानियत और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को ऐसा आचरण करना चाहिए जिससे समाज में प्रेम और देश की छवि मजबूत हो। दुआ समाप्त होते ही देश-विदेश से आए लाखों लोग अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना होने लगे, जिसके चलते पूरे नूंह जिले में अभूतपूर्व भीड़ और यातायात दबाव देखने को मिला। जलसे के सफल आयोजन को लेकर पूरे जिले में चर्चाओं का माहौल रहा। लोगों ने इंतजामिया कमेटी द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना की, वहीं सोशल मीडिया पर भी आयोजन से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो और पोस्ट पूरे दिन वायरल होती रहीं। आयोजकों के अनुसार इस तीन दिवसीय जलसे में देश और विदेश से करीब 10 लाख लोगों की मौजूदगी रही। कार्यक्रम में मौलाना मुहम्मद साद की दीनी तकरीर सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ी, जिसने इस आयोजन को क्षेत्र के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल कर दिया।
समापन के बाद हालात बिगड़े :
हालांकि जलसे के समापन के बाद सोमवार सुबह जिले में हालात अचानक बिगड़ गए। लाखों लोगों के एक साथ लौटने से नूंह शहर और आसपास का पूरा इलाका जाम की चपेट में आ गया। सुबह करीब 9 बजे से ही जिले के प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। एनएच-248 दिल्ली-अलवर रोड, नूंह-तावडू रोड, नूंह-होडल रोड, नूंह-हथीन रोड और नूंह-पलवल रोड सहित शहर की अंदरूनी सड़कों और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर यातायात लगभग ठप हो गया। कई जगह वाहन रेंगते नजर आए, जबकि कुछ स्थानों पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई।
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गाड़ियों को धक्का लगाने पर मजबूर हुए लोग :
जाम इतना भीषण था कि कई वाहन चालकों को अपनी गाड़ियों को धक्का लगाकर आगे बढ़ाना पड़ा। बड़ी संख्या में लोग अपनी गाड़ियां बीच रास्ते में छोड़कर पैदल निकलते दिखाई दिए। कुछ लोग खेतों, कच्चे रास्तों और गांवों के अंदरूनी मार्गों से होकर अपने गंतव्य तक पहुंचने का प्रयास करते नजर आए। यह दृश्य पूरे इलाके में अव्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश कर रहा था। बाहर से आए लोगों के लिए यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण रही, क्योंकि उन्हें स्थानीय रास्तों की पर्याप्त जानकारी नहीं थी।
संचार सेवाओं पर भी पड़ा असर :
भीषण भीड़ का असर संचार सेवाओं पर भी पड़ा। लाखों लोगों की एक साथ मौजूदगी के कारण मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह चरमरा गया। कॉलिंग और इंटरनेट सेवाएं लगभग ठप हो जाने से लोग अपने परिजनों और साथियों से संपर्क नहीं कर सके। इससे कई स्थानों पर अफरा-तफरी और चिंता का माहौल बन गया।
जाम नियंत्रित करने में जुटे रहे ट्रैफिक कर्मी :
जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें लगातार हालात को संभालने में जुटी रहीं। जगह-जगह पुलिसकर्मी यातायात को नियंत्रित करते दिखाई दिए, जबकि स्थानीय लोगों ने भी सहयोग कर व्यवस्था सामान्य बनाने में अहम भूमिका निभाई। प्रशासन की सूझबूझ और स्थानीय लोगों के सहयोग से कुछ मार्गों पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य होने लगा, लेकिन भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि कई घंटों तक समस्या बनी रही।
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लोग बोले, प्लानिंग की रही कमी :
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतने बड़े आयोजन के बाद बेहतर ट्रैफिक प्लानिंग और मोबाइल नेटवर्क प्रबंधन की जरूरत थी, जिसकी कमी साफ नजर आई। उनका मानना है कि भविष्य में इस तरह के बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए वैकल्पिक मार्ग, पार्किंग जोन और संचार सेवाओं की विशेष व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।