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टैरिफ संकट: निर्यातकों को बाजार तलाशने में मदद करे सरकार

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- निर्यातकों के सामने 50 फीसदी टैरिफ से खड़ी होंगी मुश्किलें, सरकार से मांगी मदद
- गुरुग्राम और मानेसर के उद्यमी बोले- ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने से निर्यात पर बुरा असर
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने से गुरुग्राम और मानेसर के निर्यातकों की चिंताएं बढ़ गई है। खास तौर पर गारमेंट, ऑटोपार्ट्स, लेदर आदि निर्यातकों को अपने वर्तमान आर्डर कैंसिल होने का खतरा मंडरा रहा है। उद्यमियों ने सरकार से संकट के इस दौर में नए बाजार तलाशने में मदद देने की मांग की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर सात अगस्त से 25 प्रतिशत टैरिफ और अतिरिक्त जुर्माना लगाने की घोषणा की थी। तब निर्यातकों की चिंता बढ़ी पर समाधान की उम्मीद थी। अब ट्रंप ने 50 फीसदी टैरिफ करने की घोषणा से उद्यमी हैरत में है। इससे प्रतिद्वंद्वी देशों पर लगाए गए कम टैरिफ का असर अमेरिका में भारतीय निर्यात पर पड़ना तय है। ऑटोमोबाइल ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल्स, लेदर और जेम्स-ज्वैलरी जैसे सेक्टरों के निर्यातकों को अस्थायी झटका लग सकता है।
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वर्जन

उद्योगों को 50 फीसदी टैरिफ से जोर का झटका लगा है। जिन उद्योगों का मुख्य निर्यात अमेरिका में है, वह मुश्किल में है। जो आर्डर पूरे कर रहे हैं, वह अटक जाएंगे। जब तक यह मामला तय नहीं होता, यह हमारे लिए गंभीर समस्या है
- विकास गुप्ता, महासचिव मानेसर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन


भारत अमेरिका को अपने कुल निर्यात का 18 प्रतिशत निर्यात करता है। उसके 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने से निर्यात कम हो जाएगा, लेकिन जिन्हें हमारे गुणवत्ता वाले उत्पाद चाहिए, वह लेंगे। हम नए बाजार तलाश लेंगे, लेकिन इसमें लंबा समय लगेगा। सरकार नए बाजार तलाशने में मदद करे।
दीपक मैनी, चेयरमैन प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री
गारमेंट उद्योग के लिए बड़ा संकट है। अगर इस माह के अंत तक हल न निकला तो काफी संख्या में उद्योग बंद हो जाएंगे और रोजगार में कटौती करनी होगी। गारमेंट उद्योग 60 फीसदी निर्यात अमेरिका के लिए करता है। प्रतिस्पर्धी देशों में कम ड्यूटी लगाने से बाजार खिसक जाएगा।
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अनिमेष सक्सेना, अध्यक्ष उद्योग विहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन


टैरिफ से भारतीय उत्पाद अमेरिका में महंगे हो जाएंगे। इससे दूसरे देशों से सस्ता सामान अमेरिकी खरीदार मंगवा सकते हैं। स्टील, कपड़े, ऑटो पार्टस, लेदर आदि की बिक्री कम होने से छोटे उद्योग खतरे में पड़ जाएंगे। यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीकी देशों में नए खरीदार तलाशने होंगे
- संजीव बंसल, महासचिव गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन


पूनम
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