कम फीस के बावजूद सामान्य कोर्स में दाखिले कम, 6 अक्तूबर तक बढ़ी प्रवेश प्रक्रिया
नंबर गेम- 180 सीटें 360 में से सेक्टर-9 कॉलेज में खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। जिले के सरकारी कॉलेजों में नए सत्र में फीस कम होने के बावजूद बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गईं। दाखिले की अंतिम तिथि 6 अक्तूबर तक बढ़ाने के बाद कॉलेजों को सामान्य कोर्स में खाली सीटें भरने की उम्मीद है, लेकिन इस बार दाखिला कम रहने के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं। शिक्षकों के अनुसार विद्यार्थियों का रुझान अब प्रोफेशनल कोर्स की तरफ ज्यादा है। इसके अलावा कई विद्यार्थी दिल्ली विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालयों, प्रोफेशनल कोर्स और दूरस्थ शिक्षा जैसे विकल्पों की ओर जा रहे हैं। इसके पीछे बड़ा कारण स्थानीय कॉलेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के साथ रोजगार के कम अवसर हैं।
सरकारी कॉलेजों में फिलहाल बड़ी संख्या में यूजी और पीजी सीटें खाली हैं। सेक्टर-9 कॉलेज में यूजी की 360 में से 180 और पीजी की 1430 में से 215 सीटें खाली हैं। द्रोणाचार्य कॉलेज में भी यूजी की 300 और पीजी की 270 सीटें खाली हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि स्थानीय स्तर पर कई पाठ्यक्रमों में सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन पसंद के विषय, प्रोफेशनल कोर्स और अन्य संस्थानों में अवसरों के चलते विद्यार्थी बाहर का रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि नए सत्र में साइंस स्ट्रीम में विद्यार्थियों का रुझान कम दिखाई दे रहा है। इसका असर कॉलेजों में सीटों पर पड़ा है। विद्यार्थी दूसरे संस्थानों में उपलब्ध पाठ्यक्रम और कॅरिअर विकल्पों को भी ध्यान में रख रहे हैं। विद्यार्थी अब कॉलेज चुनते समय आगे मिलने वाले अवसरों को भी देखते हैं।
वर्जन
विद्यार्थियों का रुझान अब प्रोफेशनल कोर्स की तरफ बढ़ रहा है। इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी अच्छी रहती है। इसका असर स्थानीय कॉलेजों में दाखिले पर दिखाई देता है। पसंद के विषय और अन्य संस्थानों में बेहतर अवसर के चलते विद्यार्थी बाहर का रुख कर रहे हैं। -प्रो. सुभाष सपरा, पूर्व कॉमर्स विभागाध्यक्ष, द्रोणाचार्य कॉलेज
कुछ विद्यार्थी ऐसे भी हैं जो घर से बाहर जाकर पढ़ाई नहीं करना चाहते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के लिए इग्नू जैसी दूरस्थ शिक्षा व्यवस्था एक विकल्प बन रही है। इसके अलावा विद्यार्थी अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार अलग-अलग संस्थानों का चुनाव कर रहे हैं। -सोनम बंसल, चेयरपर्सन, डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन, गुरुग्राम यूनिवर्सिटी
वैसे तो कॉलेज में 90 प्रतिशत सीटें भर चुकी हैं। बाकी जो ग्रामीण क्षेत्र के जो कॉलेज हैं उनमें सीटें खाली रह गई हैं। जिसकी वजह से दाखिले की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है। प्रोफेशनल कोर्सेज की कमी एक बड़ा कारण है। छात्रों को बाहर रोजगार के बेहतर अवसर मिलते हैं, इसलिए वह दाखिला लेने से कतरा रहे हैं। - मनीषा राणा, प्राचार्या, द्रोणाचार्या कॉलेज गुरुग्राम
इन कारणों से बढ़े रुझान
- बदलते कॅरिअर विकल्प और नौकरी की मांग
- बीसीए, बीबीए, बी.टेक, बी.कॉम की लोकप्रियता
-तकनीकी शिक्षा का महत्व
-रोजगार के बेहतर अवसर