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Gurugram News: शहर में संकट से गांव की ओर लौटे कदम

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श्रमिक बोले, रोजगार घटा, बसों का किराया बढ़ा...मजबूरी में लौट रहे गांव
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संवाद न्यूज एजेंसी

गुरुग्राम। अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता का असर साइबर सिटी के औद्योगिक क्षेत्रों में साफ दिख रहा है। बढ़ती महंगाई, रसोई गैस के आसमान छूते दाम और निजी बसों के दोगुने किराये ने प्रवासी श्रमिकों की कमर तोड़ दी है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि बड़ी संख्या में श्रमिक काम छोड़कर अपने गांवों की ओर लौटने को मजबूर हैं।
राजीव चौक स्थित निजी बस स्टैंड पर इन दिनों उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल जाने वाले श्रमिकों की भारी भीड़ देखी जा रही है। श्रमिकों का कहना है कि काम के घंटे कम होने और मजदूरी घटने से गुजारा करना नामुमकिन हो गया है। पहले जहां घर जाने का किराया 1200 रुपये था, अब वह बढ़कर 2200 रुपये तक पहुंच गया है। स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पलायन इसी रफ्तार से जारी रहा, तो जल्द ही निर्माण कार्यों और उद्योगों में लेबर की भारी कमी हो जाएगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।
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श्रमिक बोले-कोरोना में भी नहीं हुई थी इतनी परेशानी


पहले जैसे-तैसे गुजारा हो जाता था लेकिन अब काम भी कम है और खर्चा भी ज्यादा हो रहा है। कई दिन हो गए हैं सिलिंडर लेना मुश्किल हो गया है, इसलिए गांव जाना ही बेहतर लग रहा है। - सुबोध शर्मा, बसई रोड निवासी

कोरोना के समय भी इतनी परेशानी नहीं हुई थी जितनी अब हो रही है। अब रोज कमाई कम होती जा रही है और किराया दोगुना हो गया है। यहां रहना अब संभव नहीं है। -सुरेश, सुखराली निवासी
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बिहार के पिपरा जा रहा हूं क्योंकि पहले दिहाड़ी 600-700 रुपये मिलती थी लेकिन अब 300-400 में ही काम करना पड़ रहा है। ऊपर से खाने-पीने का खर्च बढ़ गया है। - चंदन, सुकरौली एनक्लेव, निवासी

हम लोग यहां कमाने आए थे लेकिन अब बचत तो दूर, खर्च भी नहीं निकल पा रहा। गैस और किराये की मार ने हालात खराब कर दिए हैं। -शत्रुघ्न कामत, मंगरोला निवासी
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