आरोप है कि 3-4 दिन तक एसटीएफ ने अवैध रूप से हिरासत में रखा था
कोर्ट ने पुलिस के दावों पर संदेह करते हुए गैंगस्टर दीपक नांदल के कथित शूटर को दी जमानत
सोनू यादव
गुरुग्राम। गैंगस्टर दीपक नांदल का शूटर बताकर 13 अप्रैल की देर रात मुठभेड़ के बाद पुलिस ने नितेश उर्फ ढिल्ला को पकड़ा था। लेकिन अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं। नितेश की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उसके अधिवक्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि उसे गुरुग्राम में मुठभेड़ के बाद काबू नहीं किया गया, बल्कि नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया था। ये भी आरोप लगाया गया कि एसटीएफ ने उसे 3-4 दिन तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यशविंदर पॉल सिंह की अदालत ने नितेश उर्फ ढिल्ला को नियमित जमानत दे दी है।
अदालत ने नितेश को जमानत देते हुए पुलिस द्वारा पेश किए गए दावों पर संदेह व्यक्त किया। अदालत ने पाया कि जांच पूरी हो चुकी है और चालान भी पेश किया जा चुका है। याचिकाकर्ता के गैंगस्टर दीपक नांदल या कारोबारी से संबंध का कोई ठोस सबूत पेश करने में पुलिस विफल रही। बता दें कि पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, 13 अप्रैल 2026 की रात पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गैंगस्टर दीपक नांदल का शूटर नितेश उर्फ ढिल्ला एक कारोबारी के कार्यालय पर गोली चलाने वाला है। सूचना के आधार पर पुलिस ने डीएलएफ फेज-1 थाना इलाके में नाकाबंदी की और उसे रोकने का प्रयास किया। पुलिस का दावा है कि नितेश ने पुलिस पार्टी को देखकर अपनी बाइक की गति बढ़ा दी और बैरिकेड को टक्कर मारकर भागने की कोशिश की। पीछा करने पर उसने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर गोली चलाई, जिसमें सब इंस्पेक्टर की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोलियां लगीं। पुलिस के अनुसार, आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में गोली नितेश के दाहिने टखने पर लगी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया और 14 अप्रैल 2026 से वह हिरासत में था। उसके खिलाफ डीएलएफ फेज-1 थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
सीसीटीवी फुटेज नहीं जमा कराने का एसटीएफ पर आरोप
नितेश के अधिवक्ता की ओर से सेशन कोर्ट में लगाई इस जमानत याचिका से पहले पुलिस कार्रवाई को लेकर निचली अदालत में भी अर्जी दी गई। इसमें भी आरोप लगाया गया कि पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा और एसटीएफ गुरुग्राम ऑफिस की सीसीटीवी फुटेज कोर्ट में जमा कराने की गुहार लगाई। निचली अदालत इसे लेकर निर्देश दे चुकी है। आरोप है कि इसके बावजूद एसटीएफ की ओर से फुटेज जमा नहीं कराई गई है। अब जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान भी एसटीएफ की ओर से सीसीटीवी फुटेज जमा न कराने का हवाला दिया गया।