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Gurugram News: शिक्षा का मंदिर बना खतरों का घर, राम भरोसे 600 बच्चों का भविष्य

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- 337 बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र दो अध्यापक की नियुक्ति
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- मात्र 13 कमरों में चल रहा 600 से अधिक छात्रों वाला स्कूल



रिजवान खान नगीना।



खंड के बलई गांव का प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल विभाग की अनदेखी के कारण वर्षों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्कूल का जर्जर भवन सरकार के बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के दावों की पोल खोल रहा है। करीब 45 साल पहले बना यह स्कूल आज बच्चों के लिए शिक्षा का मंदिर नहीं, बल्कि खतरे का घर बन गया है।

प्राइमरी स्कूल के हेड टीचर नसरुद्दीन का कहना है कि 337 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी मात्र दो अध्यापकों पर है। अध्यापकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई ठीक से नही हो पाती। अध्यापकों की कमी को लेकर कई बार विभाग को अवगत कराया गया। लेकिन विभाग की तरफ से अभी तक पर्याप्त अध्यापक नही मिल पाएं हैं। वहीं मिडिल स्कूल में 278 बच्चें पढ़ने के लिए आते हैं। मगर स्कूल भवन में मात्र तीन कमरे होने के कारण बच्चों को बरामदे में बैठाना पड़ता है।
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13 में 9 कमरें हैं जर्जर
बता दें कि स्कूल में कुल 13 कमरे हैं, जिनमें से 9 कमरे जर्जर अवस्था में हैं और 5 कमरे पूरी तरह खस्ताहाल घोषित किए जा चुके हैं। इन कमरों की छतों का लेंटर गिरने की कगार पर हैं। बरसात के मौसम में पानी गिरता रहता है जिससे कमरों के अंदर पानी भर जाता है। इनमें से एक कमरा ऑफिस, एक स्टोर रूम व एक कमरा लाइब्रेरी के इस्तेमाल में लाया जाता है।

कमरों की कमी के चलते बच्चों को बरामदों में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। यहां न बिजली की उचित व्यवस्था है और न ही पंखे उपलब्ध हैं। गर्मी, धूप और बरसात के बीच बच्चों को पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिससे उनकी सेहत और पढ़ाई दोनों पर असर पड़ रहा है।

स्कूल के मैदान में बरसात का पानी जमा होने के कारण गंदगी जमा है। स्कूल भवन की सामने की दीवार के पास से गंदा नाला गुजरता है, जिससे दीवार के गिरने का खतरा बना हुआ है। साथ ही, स्कूल के प्रांगण में बड़ी-बड़ी घास उग आई है, जिसमें जहरीले कीड़े छिपे होने का डर बना रहता है।

जर्जर अवस्था में हैं लड़कों का शौचालय

स्कूल में बना लड़कों का शौचालय पूरी तरह जर्जर अवस्था में है और आसपास झाड़ियां खड़ी होने के कारण बच्चे खुले में शौच करने को मजबूर हैं। छात्रों का कहना है कि शौचालय में शौच करने जाते समय जहरीले कीड़ों के काटने का डर बना रहता है। छात्रों की मांग है कि शौचालय की मरम्मत कर आसपास सफाई करवाई जाए। देखा जाए तो यह सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि पूरे गांव के भविष्य की अनदेखी है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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जर्जर कमरों को बनाने के लिए टेंडर पास हो गया है। जल्दी ही पुराने कमरों को तुड़वाकर नए कमरे बनवाने का कार्य शुरू करवाया जाएगा। खामियों को सुधारने के लिए स्कूल का जायजा लेकर उच्च अधिकारियों के साथ मिलकर समस्याओं का समाधान किया जाएगा। -गीता आर्य, खंड शिक्षा अधिकारी नगीना।
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