गुरुग्राम (अंजू सिंह)। फीस वृद्धि के बाद निजी स्कूलों ने नए प्रवेश के लिए अचानक अभिभावकों को ऑफर देने शुरू कर दिए हैं। उधर, पुराने छात्रों पर फीस जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है। उनसे एक साथ वार्षिक फीस, प्रवेश फीस आदि की मांग की जा रही है। दूसरी ओर, स्कूल विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए दूसरे स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे अभिभावकों को संदेश भेजकर वार्षिक फीस, प्रवेश शुल्क आदि माफ करने का ऑफर दे रहे हैं। उनसे ट्यूशन शुल्क भी केवल 50 फीसदी ही जमा कराने की बात वे कह रहे हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश में 43,293 विद्यार्थियों ने प्राइवेट छोड़कर सरकारी स्कूलों में प्रवेश लिया है। गुरुग्राम में 2453 विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों की ओर रुख किया है। ऐसे में निजी स्कूल पुराने विद्यार्थियों से पूरा शुल्क वसूलने के लिए दबाव बना रहे हैं तो नए प्रवेश बढ़ाने के लिए ऑफर भी दे रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि आर्थिक संकट के दौर में स्कूलों के नए खेल ने असमंजस पैदा कर दिया है। वे फीस माफी के ऑफर के बाद बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेजने का विचार बना रहे हैं। गुरुग्राम अभिभावक संगठन के सदस्यों का कहना है कि निजी स्कूल अभिभावकों की जेब काटने के नए पैतरे अपना रहे हैं।
एक अभिभावक हिमांशु ने बताया कि पुराने स्कूल में फीस जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा है तो उन्हें नए स्कूलों के संदेश मिल रहे हैं। उन्हें दूसरे स्कूलों में बिना प्रवेश और वार्षिक शुल्क दाखिला मिलेगा तो बच्चों को वहीं भेजेंगे। हालांकि बकाया जमा किए बिना पुराने स्कूल से स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट मिलना मुश्किल है।
ऑनलाइन कक्षाओं में आईडी ब्लॉक
डीपीएस सुशांत लोक ने अभिभावकों के फीस जमा न करने पर 500 से ज्यादा विद्यार्थियों की आईडी ब्लॉक कर दी है। ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान शिक्षकों द्वारा छात्रों से फीस मांगने के मामले भी सामने आए हैं। अभिभावक संगठनों ने ट्विटर पर फीस माफी की गुहार लगाई है। एक अभिभावक कमल का कहना है कि फीस जमा न कराने पर स्कूल हर रोज सौ रुपये देरी शुल्क लगाने की बात कह रहे हैं। जब छात्र घर बैठे पढ़ाई कर रहा है तो वार्षिक फीस, प्रवेश शुल्क एक साथ लेना गलत है।