गुरुग्राम। फर्जी दस्तावेज के आधार पर चुनाव जीतकर सरपंच बनने वाली महिला को जांच के बाद जिला उपायुक्त डॉ. यश गर्ग ने तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया है। सीमा (सरिता) नामक महिला ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर पांच साल पहले चुनाव के लिए नामांकन किया था और फिर जीतकर सरपंच बनी थी। सीमा ने 2016 में बांस हरिया ग्राम पंचायत से चुनाव लड़ा था और वह महज 7 मतों से चुनाव जीतकर सरपंच बनी थीं। इसके बाद गांव के ही एक व्यक्ति ने प्रमाण के साथ सीमा के दस्तावेज फर्जी होने की शिकायत पंचायत विभाग के वित्त आयुक्त से की थी। वित्त आयुक्त के निर्देश पर विजिलेंस ने मामले की जांच की थी।
जांच के दौरान पता चला कि उक्त महिला द्वारा पेश किए गए दस्तावेज यूपी के गौतमबुद्धनगर जिले के एक इंटर कॉलेज से संबंधित थे। संबंधित कॉलेज से संपर्क करने पर पता चला कि जो रोल नंबर महिला के दस्तावेज में अंकित है, उस रोल नंबर पर 1997 में एक छात्रा ने सातवीं कक्षा में दाखिला लिया था। जांच के दौरान प्रथमदृष्ट्या मामला संदिग्ध पाए जाने पर उपायुक्त ने बांस हरिया की सरपंच को निलंबित कर दिया था और पूरे मामले की जांच अतिरिक्त उपायुक्त को सौंप दी थी।
अतिरिक्त उपायुक्त ने आरोपी महिला को अपना पक्ष रखने का मौका भी दिया लेकिन वह अपने दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि नहीं करा सकीं। इसके बाद अतिरिक्त उपायुक्त की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर जिला उपायुक्त डॉ. यश गर्ग ने महिला सरपंच को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया।