कहा, रखरखाव शुल्क नहीं देने पर नहीं बंद की जा सकतीं जरूरी सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पिछले दिनों मेफील्ड गार्डन एन ब्लॉक मामले में रजिस्ट्रार जनरल ऑफ सोसाइटीज का आदेश आया कि बकाए रखरखाव की राशि की वसूली के लिए आरडब्ल्यूए कचरा उठाना, डिजिटल एक्सेस सिस्टम बंद करने जैसी आवश्यक सेवाएं बंद नहीं कर सकता है। इसको लेकर शहर में लोगों के बीच इसके पक्ष और विपक्ष पर चर्चा शुरू हो गई है।
लोगों का कहना है कि इस फैसले से विभिन्न साेसाइटियों का प्रबंधन कर रहे आरडब्ल्यूए की मनमानी रुकेगी, वही आरडब्ल्यूए ररखरखाव की राशि से होने वाले कार्य और राशि नहीं मिलने से होने वाली अव्यवस्था गिना रहे हैं। दूसरी ओर जिस आरडब्ल्यूए का यह मामला है, वे रजिस्ट्रार जनरल के पास रिव्यू पीटिशन देेने की तैयारी में है। एन ब्लॉक के पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष जीवांगन ने बताया कि आरडब्ल्यूए इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। मेफील्ड गार्डन हाईराइज सोसाइटी नहीं है, यह प्लॉटेड कॉलोनी है। यहां ऐसे आदेश पर दिक्कत आएगी। यहां के 700 घरों के लिए सेंट्रल सेक्यूरिटी सिस्टम, सफाई व्यवस्था जैसे कई खर्च हैं। सोसाइटी के कई एंट्री प्वाइंट होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था पर करीब 5.5 लाख रुपये खर्च होते हैं। सफाई व्यवस्था में करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च होते हैं। नगर निगम इस प्लॉटेड कॉलोनी को बल्क वेस्ट जेनरेटर मानते कचरा प्रबंधन खुद करना निश्चित किया है। ये पैसे आरडब्ल्यूए कहां से लाएगा और निवासी रखरखाव की राशि नहीं देंगे।
इस याचिका को दायर करने वाले संजय बताते हैं कि उन्होंने यह याचिका रखरखाव की राशि के खर्च की पारदर्शिता को लेकर लगाई थी। रखरखाव की राशि 2200 से 5000 रुपये प्रति माह कर दी गई। नहीं देने पर पैनल्टी प्रतिदिन एक प्रतिशत रखी गई। जीबीएम (जनरल बॉडी मीटिंग) की सूचना समय से नहीं दी गई। रखरखाव की राशि बढ़ाने को लेकर लोगों से रायशुमारी नहीं हुई मेंटनेंस नहीं देने पर माई गेट एक्सेस आदि कई सुविधाएं हटाई गई, इसलिए मजबूरन शिकायत करनी पड़ी। जिला स्तर और राज्य स्तर से होते हुए यह मामला रजिस्ट्रार जनरल के पास पहुंचा।