-राजस्थान, यूपी से सस्ता गेहूं लाकर मंडी में दिखा रहे सरकारी खरीद
संवाद न्यूज एजेंसी
पुन्हाना। अनाज मंडी में गेहूं की सरकारी खरीद एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश से सस्ते दामों पर गेहूं खरीदकर उसे स्थानीय मंडी में लाकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकारी खरीद में दर्शाया जा रहा है। इस पूरे खेल में व्यापारियों के साथ-साथ मार्केट कमेटी के अधिकारियों व कर्मचारियों की कथित सांठगांठ भी सामने आ रही है।
सूत्रों के अनुसार यूपी के सीमावर्ती क्षेत्र से गेहूं 2200 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदा जा रहा है। इसके बाद इसी गेहूं को पुन्हाना अनाज मंडी में लाकर 2585 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी पर सरकारी खरीद में शामिल कराया जा रहा है। इस अंतर से कुछ ही दिनों में मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय किसान मुजीबुर्रहमान, इरशाद, नावेद, का कहना है कि इस तरह की अनियमितताएं हर साल गेहूं और सरसों की खरीद के दौरान सामने आती हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से यह खेल लगातार जारी है।
किसानों का आरोप है कि बाहरी राज्यों से लाई गई फसल को स्थानीय किसानों के नाम पर दिखाकर सरकारी खरीद में शामिल किया जाता है, जिससे असली किसानों को अपनी फसल बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बाहर से लाई गई फसल के कारण स्थानीय किसानों की उपज की खरीद प्रभावित हो रही है। कई किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जबकि कुछ को मजबूरी में कम दामों पर निजी व्यापारियों को फसल बेचनी पड़ती है।
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पारदर्शिता पर उठे सवाल :
फिलहाल, मंडी में चल रहे इस कथित खेल ने सरकारी खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंच सके। वहीं इस बारे में मार्केट कमेटी के सचिव शैलेंद्र बंसल से संपर्क करने की कोशिश की तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
बाहर से अगर गेहूं मंडी में आ रहा है तो इसकी जांच की जाएगी, मार्केट फीस की चोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।’’
महादेव पटेल, चेयरमैन, मार्केट कमेटी, पुन्हाना