-नूंह शहर को एनएच-248ए से जोड़ने वाले मुख्य मार्ग का मामला
-ग्रामीणों ने उठाए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले के विकास कार्यों पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन अधिकारियों की कथित लापरवाही और निर्माण एजेंसियों की मनमानी के कारण सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण नूंह शहर को एनएच-248ए से जोड़ने वाले मुख्य रोड पर देखने को मिला है, जो निर्माण के एक माह के भीतर ही जगह-जगह से उखड़ने लगा है। सड़क की खराब हालत को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है और उन्होंने नगरपरिषद में शिकायत देकर निर्माण कार्य की जांच की मांग उठाई है।
नए बस अड्डे के सामने से शहर को जोड़ने वाला यह मार्ग लंबे समय से बदहाल पड़ा हुआ था। सड़क पर गड्ढे, टूटी सतह और बरसात में कीचड़ के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। स्थानीय नागरिकों की लगातार मांग के बाद नगरपरिषद ने करीब 37 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण का टेंडर जारी किया था। लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने पहले तो काम शुरू करने में काफी देरी की और बाद में जल्दबाजी में घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर सड़क तैयार कर दी।
स्थानीय निवासी खलील अहमद, विजय कुमार, प्रवीण शर्मा, सुनील, इकलास और रविंद्र ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान ही नगरपरिषद अधिकारियों को गुणवत्ता को लेकर अवगत कराया था। उनका कहना है कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई, लेकिन अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। अब हालत यह है कि सड़क का लिंटर कई स्थानों से टूटने और उखड़ने लगा है। लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण एजेंसी ने सरकारी राशि का दुरुपयोग करते हुए लापरवाही बरती है। स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि सड़क किनारे वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए डाली गई मिट्टी तक अभी नहीं हटाई गई है, जबकि सड़क पहले ही क्षतिग्रस्त होने लगी है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नगरपरिषद चेयरमैन संजय मनोचा ने बताया कि निर्माण एजेंसी ने अभी तक भुगतान के लिए बिल प्रस्तुत नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही घटिया निर्माण की शिकायत मिली, ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश दे दिए गए थे कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चेयरमैन ने कहा कि जब तक सड़क को पूरी तरह दुरुस्त नहीं किया जाता, तब तक निर्माण एजेंसी को भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में और अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने पर भी विचार किया जाएगा।