क्यों लगी है कीमतों में आग?
बाजार के जानकारों और व्यापारियों की मानें तो इस महंगाई के पीछे का सबसे बड़ा कारण मंडियों से माल की कम आवक (सप्लाई) होना है। पीछे से स्टॉक कम आने की वजह से थोक बाजारों में कीमतें बढ़ीं, जिसका सीधा असर अब आम उपभोक्ताओं की थाली पर पड़ रहा है। आपूर्ति में आई इस कमी ने सरसों के तेल से लेकर रोजमर्रा के पिसे मसालों तक की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है।
एक किलो की जगह 'आधा पाव' पर आए लोग
महंगाई की इस मार ने ग्राहकों के व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया है। व्यापारियों का कहना है कि जो ग्राहक पहले बेफिक्र होकर एक किलो या उससे अधिक मसाले एक बार में तौलवाते थे, वे अब आधा किलो, पाव या सिर्फ हफ्ते भर की जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं। राशन की लिस्ट अब छोटी हो गई है और बजट को लेकर हर घर में माथापच्ची चल रही है।
क्या कहते हैं बाजार के दुकानदार?
मंडियों से माल बेहद कम मात्रा में आ रहा है, जिसके कारण कई मुख्य मसालों के दाम अचानक बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ा है। अब लोग पहले की तुलना में बहुत ही नाप-तोल कर और कम मात्रा में मसाले खरीद रहे हैं, जिससे हमारा टर्नओवर भी प्रभावित हुआ है। -शिवम कुमार, दुकानदार (सदर बाजार)
मसालों और सरसों तेल का रेट बढ़ने से ग्राहकों की खरीदारी का तरीका पूरी तरह बदल गया है। खासकर छोटे और मध्यमवर्गीय परिवार अब फालतू खर्च से बच रहे हैं और सिर्फ उतना ही सामान ले रहे हैं, जिसके बिना काम रुक जाए। बाजार में पहले जैसी रौनक गायब है। -कालू, दुकानदार (सदर बाजार)
कुल मिलाकर, रसोई का स्वाद बरकरार रखने के लिए अब लोगों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। जब तक मंडियों से आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक आम आदमी को इस तीखी महंगाई के तड़के को झेलना ही पड़ेगा।