बदली रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा, अब बेटियों और बहनों की राखियों की भी बाजार में भरमार
संवाद न्यूज एजंसी
गुरुग्राम। रक्षा बंधन अब सिर्फ भाई-बहन के त्योहार तक सीमित नहीं रह गया। इस त्योहार के बदलते स्वरूप के तहत अब रक्षा बंधन हर रिश्ते का उत्सव बन गया है। यह वजह है कि अब बाजार में सिर्फ बच्चों व भाइयों की राखी न होकर बहन और बेटियों के लिए भी राखियों का भरमार होने लगी है। सेक्टर-चार की योगिता ने बताया कि रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा बदल रही है। किसी जमाने में पंडित जी रक्षा सूत्र बांधते थे। इसके बाद बहने भाईयों को राखी बांधने लगी। यह रिवायत तो अब भी है मगर अब बेटियां भी एक दूसरे को राखी बांधती हैं। ला लगून में रहने वाली कविता बंसल ने कहा कि उनकी दोनों बेटियां एकदूसरे को राखी बांधती हैं। बेटियों की राखियां गोटा, चमकीले धागों, मोतियों और बीड़्स से सजी हुई हैं। बाजार के हिसाब से राखियों की कीमतें अलग-अलग है।