मानसून के दौरान जलभराव के स्थायी समाधान के लिए अब बरसाती पानी को आसपास के क्षेत्रों में ही रोककर भूजल रिचार्ज करने की रणनीति पर काम होगा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मानसून के दौरान गुरुग्राम में होने वाले जलभराव के स्थायी समाधान के लिए अब बरसाती पानी को शहर से बाहर निकालने के बजाय शहर और आसपास के क्षेत्रों में ही रोककर भूजल रिचार्ज करने की रणनीति पर काम किया जाएगा। इसके लिए तालाब, इंजेक्शन वेल और अरावली में बांध बनाकर पानी संचय पर जोर दिया जाएगा।
हरियाणा शहरी विकास विभाग के प्रधान सलाहकार डीएस ढेसी ने शुक्रवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर जलभराव से निपटने के उपायों पर मंथन किया और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। डीएस ढेसी ने जीएमडीए और दोनों नगर निगमों को अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे स्थान चिन्हित करने के निर्देश दिए, जहां नए तालाब या झील विकसित की जा सकें। मानेसर के शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण इलाकों में जलभराव अधिक देखने को मिला है इसलिए मानेसर निगम क्षेत्र में शामिल गांवों में कम से कम 15 ऐसे गांव चिन्हित किए जाएं, जहां बड़े जलाशय बनाकर बरसाती पानी को रोका जा सके। अधिकारियों ने बताया कि मानेसर निगम क्षेत्र के 30 गांवों में 85 जोहड़ और तालाब हैं। इनमें से पानी के बहाव, जलग्रहण क्षेत्र और आकार के आधार पर बड़े जलाशयों को चिन्हित कर उनकी क्षमता बढ़ाने की संभावनाएं तलाश की जाएंगी।
इंजेक्शन वेल से जमीन में पहुंचाएंगे बारिश का पानी
बैठक में इंजेक्शन वेल की योजना पर भी चर्चा हुई। ढेसी ने नगर निगम अधिकारियों से आईआईटी गांधी नगर के सहयोग से तैयार किए जा रहे इंजेक्शन वेल के डिजाइन और प्रस्तावित संख्या की जानकारी ली। अधिकारियों के अनुसार 50 लीटर प्रति सेकंड क्षमता वाले इंजेक्शन वेल का डिजाइन तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से बारिश के पानी को जमीन के भीतर पहुंचाकर भूजल रिचार्ज किया जा सकेगा। जीएमडीए के सीईओ पीसी मीणा ने बताया कि आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों के सहयोग से पांच वैज्ञानिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं। इनमें से सेक्टर-31 की ग्रीन बेल्ट में एक स्ट्रक्चर तैयार हो चुका है। इसमें लगे फ्लो मीटर के अनुसार एक बारिश में करीब 13 लाख लीटर पानी जमीन में रिचार्ज हुआ।
अरावली में पानी रोकने की संभावनाएं भी तलाशेंगे
प्रधान सलाहकार ने अरावली क्षेत्र में पहाड़ियों और प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्रों में ही बरसाती पानी रोकने की संभावनाएं तलाशने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि पानी को प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्रों में संग्रहित किया जा सके तो शहर की ड्रेनेज व्यवस्था पर दबाव कम किया जा सकता है। इसके लिए वन विभाग के अधिकारियों के साथ भी चर्चा की जाएगी। बैठक में जापानी कंपनी निपोनकोई द्वारा गुरुग्राम में जलभराव को लेकर किए जा रहे सर्वे और अध्ययन की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बैठक में जीएमडीए के सीईओ पीसी मीणा, उपायुक्त उत्तम सिंह, एचएसवीपी प्रशासक वैशाली सिंह सहित जीएमडीए, सिंचाई विभाग, गुरुग्राम और मानेसर नगर निगम, हरसैक, ट्रैफिक पुलिस तथा नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।