जीएमडीए ने ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में वर्षा जल संचयन पर समीक्षा बैठक की
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण की जांच में खुलासा हुआ है कि शहर की करीब 20 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम काम नहीं कर रहे हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए डीएस ढेसी ने 10 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली सभी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों की एक विस्तृत सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
प्रमुख सलाहकार (शहरी विकास) डीएस ढेसी की अध्यक्षता में गुरुग्राम की आवासीय ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में वर्षा जल संचयन संयंत्रों (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) की स्थिति और कार्यक्षमता की समीक्षा के लिए एक बैठक आयोजित की गई। डीटीपी जीएमडीए आरएस बाठ को उन ठेकेदारों और एजेंसियों के साथ समन्वय करने का कार्य सौंपा गया, जिन्होंने पहले ऐसी प्रणालियों की स्थापना का कार्य किया है और उन एजेंसियों की सूची तैयार करने का कार्य सौंपा गया, जो वर्षा जल संचयन संरचनाओं के रखरखाव और संचालन संबंधी कार्य करती हैं।
बैठक का मुख्य उद्देश्य मानसून ऋतु से पहले सभी वर्षा जल संचयन गड्ढों को पूरी तरह से कार्यात्मक बनाने के लिए तौर-तरीकों की रूपरेखा तैयार करना था, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि अधिकतम वर्षा जल भूजल पुनर्भरण के लिए चैनलाइज किया जा सके। इससे जलभराव को कम करने और भारी वर्षा के दौरान मुख्य सड़कों को होने वाले नुकसान को रोकने में भी मदद मिलेगी। बैठक में सलाहकार प्रशासन एसके चहल, सीटीपी जीएमडीए, संजीव मान, डीटीपी जीएमडीए, आरएस बाठ, एक्सईएन सिंचाई मनीष, जलविज्ञानी दिलबीर राणा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
10 एकड़ से अधिक में बसी सोसाइटियों पर नजर
हाल ही में जीएमडीए की ओर से विभिन्न सेक्टरों में स्थित लगभग 20 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के निरीक्षण किए गए। इसमें 5 से 10 एकड़ और उससे अधिक क्षेत्रफल वाले आवासीय क्षेत्र शामिल रहे। इसमें यह पाया गया कि खराब रखरखाव के कारण अधिकांश वर्षा जल संचयन काम नहीं कर रहे थे। इसका संज्ञान लेते हुए डीएस ढेसी ने 10 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली उन सभी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों की एक विस्तृत सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये सोसाइटियां कार्यशील वर्षा जल संचयन प्रणालियों के रखरखाव के लिए उत्तरदायी हों। स्वीकृत मानक डिजाइन को साझा करने का निर्देश दिया गया, जिन्हें सभी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों द्वारा अपनाया जाना आवश्यक है।