गुरुग्राम। नगर निगम की ओर से अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सीधा याचिका दायर करने पर अदालत ने याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब याचिकाकर्ता के पास विभाग में अपील का प्रावधान है तो पहले उसका इस्तेमाल किया जाए। यह आदेश सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रुकसाना अदालत ने दिया है। सिकंदरपुर घोसी गांव निवासी चरण सिंह ने अदालत में याचिका दायर कर कहा कि उन्होंने पुराने निर्माण किया हुआ है और वह नियमों के हिसाब से वैध है। उसने निगम की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। नगर निगम की तरफ से अदालत में दलील दी कि निगम ने पांच दिसंबर 2024 को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद चार फरवरी 2025 को ध्वस्तीकरण आदेश जारी हुआ। 20 मार्च 2025 को सीलिंग का आदेश भी पारित किया गया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि हरियाणा नगर निगम अधिनियम में ऐसे आदेश के विरुद्ध अपील का प्रावधान है। अदालत ने यह भी कहा कि नोटिस नहीं मिलने या प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का दावा भी अपीलीय प्राधिकारी के सामने रखा जा सकता है। ऐसे विवादों के आधार पर सिविल कोर्ट का अधिकार क्षेत्र नहीं बन जाता। संवाद