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26 करोड़ आबादी को आंदोलन से सीधे जोड़ने की तैयारी

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गुरुग्राम। भारतीय सेना में अहीर रेजिमेंट को लेकर 2 दिन पहले शुरू हुआ आंदोलन इस बार बड़ा रूप लेता नजर आ रहा है। आंदोलन के अगुवा संयुक्त अहीर रेजिमेंट मोर्चा ने पुराने आंदोलनों की विफलताओं से सबक लेते हुए इस बार इसे देशव्यापी बनाने की रणनीति तैयार कर ली है। इस रणनीति के तहत देश की 26 करोड़ यादव आबादी को सीधे तौर पर आंदोलन से जोड़ने की मुहिम शुरू की जा रही है। यह आंकड़े मोर्चा ने अपनी बुकलेट में दर्शाए हैं। इस मुहिम के तहत यादव समाज के बच्चे-बच्चे में अहीर रेजिमेंट-हक हमारा की अलख जगाकर उन्हें आंदोलन में शरीक होने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके साथ ही सर्वसमाज के संपूर्ण समर्थन के लिए भी अलग से रूपरेखा बनाई गई है। सेना और पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर आंदोलन से जोड़कर अहीर रेजिमेंट की जरूरत, देश के लिए यादवों के बलिदान और सेना में यादव कौम की भागीदारी देश के समक्ष रखी जाएगी। इसके लिए देशभर में मोर्चा के पदाधिकारी घूम-घूम कर आंदोलन से लोगों को जोड़ेंगे। दावा किया जा रहा है कि अहीर रेजिमेंट का आंदोलन भी किसान आंदोलन की तरह देश के प्रमुख हिस्सों में आरंभ होगा। अहिंसावादी मार्ग पर चलते हुए जगह - जगह आंदोलन के नाम पर धरने ही दिए जाएंगे। गुजरात से लेकर महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से बिहार तक अलग-अलग टीमें बनाकर उन्हें धरने की कमान जल्द ही सौंप दी जाएगी। फिलहाल यह काम गुरुग्राम में बने मोर्चा के पदाधिकारियों के जिम्मे ही होगा, जो स्थानीय लोगों को अपने साथ जोड़कर आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। इसी सप्ताह टीमें बना दी जाएंगी। मोर्चा के संस्थापक सदस्य मनोज कांकरौला और श्योचंद सरपंच के मुताबिक इस बार आंदोलन को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा। इस बार अलग धड़ों में बंटकर नहीं, बल्कि संगठित होकर आंदोलन को आगे ले जाया जाएगा। पूर्व सैनिकों के साथ राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि देश को सकारात्मक संदेश दिया जा सके।
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