फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gurugram News: अरावली जंगल सफारी पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

विज्ञापन
विज्ञापन
हरियाणा सरकार और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को नोटिस जारी
विज्ञापन


संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। हरियाणा सरकार द्वारा अरावली जू सफारी पार्क के पहले चरण को शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसी बीच हरियाणा की अरावली की लगभग 10,000 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित इस परियोजना को चुनौती दी गई है। भारत के विभिन्न हिस्सों के पांच सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों और पर्यावरण समूह पीपल फॉर अरावलीज ने जंगल सफारी पर रोक के लिए सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी याचिका दायर की है।
यह मामला अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा के लिए दायर किया गया है, जो दिल्ली-एनसीआर को मरुस्थलीकरण से बचाने वाली एकमात्र प्राकृतिक दीवार है। यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण भूजल संरक्षण, प्रदूषण अवशोषक, जलवायु नियंत्रक और वन्यजीव आवास के रूप में कार्य करता है। यह याचिका 24 सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे वन संबंधी मामले टीएन गोदावर्मन तिरुमुलपद बनाम भारत संघ एवं अन्य (रिट याचिका (सिविल) संख्या 202/1995) के तहत दाखिल की गई थी।
विज्ञापन

यह मामला 8 अक्तूबर 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया, जिसमें हरियाणा सरकार और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को नोटिस जारी किया गया। अगली सुनवाई 15 अक्तूबर 2025 को होगी। इस बीच हरियाणा सरकार को अरावली जू सफारी परियोजना पर किसी भी प्रकार का कार्य न करने का निर्देश दिया गया है। अब यह मामला सेवानिवृत आईएफएस अधिकारी डॉ. आरपी बलवान एवं अन्य बनाम राज्य हरियाणा एवं अन्य शीर्षक से वकील शिबानी घोष ने दायर किया है।

अरावली क्षेत्र की पारिस्थितिकी और जल विज्ञान को कमजोर करेगी परियोजना
मुख्य याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त वन संरक्षक, (दक्षिण क्षेत्र) डॉ. आर पी बलवान ने कहा कि हम अरावली चिड़ियाघर सफारी पार्क परियोजना को रोकने के लिए सर्वोच्च न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं क्योंकि यह गुरुग्राम और नूंह जिलों में अत्यधिक नाजुक और संवेदनशील अरावली पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मौत की घंटी बजाएगा। अरावली जैसे पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र में राजस्व को अधिकतम करने और वाणिज्यिक और मनोरंजक गतिविधियों को बढ़ाने के मुख्य उद्देश्य से तैयार की गई परियोजना में गहरी खामियां हैं। हमारी कानूनी याचिका बताती है कि यह परियोजना अरावली क्षेत्र की पारिस्थितिकी और जल विज्ञान को कैसे कमजोर करेगी।
सह-याचिकाकर्ता विनोद भाटिया हरियाणा के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने कहा कि अरावली एक महत्वपूर्ण वन्यजीव आवास, गलियारे और जैव विविधता वाले हॉटस्पॉट के रूप में कार्य करता है। महाराष्ट्र के प्रधान वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत डॉ. अरविंद कुमार झा ने कहा कि चिड़ियाघर सफारी के बाड़ और बाड़ लगाने से एनसीआर में अरावली के वन्य जीवों की मुक्त आवाजाही बाधित होगी।
विज्ञापन

यह याचिका कर्ता उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक उमाशंकर सिंह ने कहा कि यह सफारी पार्क को वन्य जीव अभयाराण्य समझ लिया जाता है, दरअसल यह एक चिड़ियाघर है, जहां जानवरों को बड़े बाड़ों में रखा जाता है। केरल की प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त सह याचिकाकर्ता प्रकृति श्रीवास्तव ने कहा कि हरियाणा का अरावली कभी भी चीतों और पक्षियों व जानवरों की कई अन्य विदेशी प्रजातियों का घर नहीं रहा है, जिन्हें प्रस्तावित चिड़ियाघर सफारी पार्क में लाने की योजना है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें