अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर 109 स्थित चिनटेल्स पेराडाइसो में मंगलवार को असुरक्षित टावर की ठोस चादरों से घेराबंदी करने पर आरडब्ल्यूए निवासियों ने विरोध किया। लोगों ने कहा कि ग्रीन बेल्ट को असुरक्षित टावर में समाहित न किया जाए। न ही पारदर्शिता के साथ समझौता किया जाए। ऐसे में बिल्डर को मजबूरन रस्सी से ही असुरक्षित टावरों की घेराबंदी करनी पड़ी।
आरडब्ल्यूए प्रधान राकेश हुड्डा ने बताया कि स्थानीय लोगों को बिल्डर के काम पारदर्शिता चाहिए। ऐसा करने पर ही वह समर्थन करेंगे। यही कारण रहा कि मंगलवार सुबह करीब 11 बजे चिनटेल्स के असुरक्षित टावरों की फेंसिंग (घेराबंदी) करने पहुंचे बिल्डर प्रतिनिधियों को स्थानीय लोगों का विरोध झेलना पड़ा। उधर चिंटेल्स बिल्डर के उपाध्यक्ष जेएन यादव का कहना है कि रविवार को फिर असुरक्षित टावर के छज्जे टूट कर गिर गए। इसलिए लोगों की जान की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चादर से घेराबंदी करने के लिए लोग भेजे गए। लोगों ने ऐसा नहीं करने दिया। यह सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
दरअसल, बीते साल 10 फरवरी को चिनटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के टॉवर डी की छठीं मंजिल की छत का एक हिस्सा गिर गया था। इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी और करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए थे। हादसे के करीब नौ महीने बाद आईआईटी दिल्ली के एक्सपर्ट्स की संरचनात्मक जांच में यह टॉवर रहने योग्य नहीं पाए गए। ऐसे में प्रशासन ने चिनटेल्स के नौ में से पांच टावरों को असुरक्षित घोषित कर उन्हें ढहाने के आदेश जारी कर दिए हैं। अब इन टावरों में रहने वाले फ्लैट मालिक अपने अपने हितों की रक्षा के लिए बिल्डर से अलग-अलग मुद्दों पर करार की मांग कर रहे हैं। इसमें निर्माण प्रक्रिया की पारदर्शिता भी एक मुद्दा है। इसको लेकर मंगलवार को एक बार फिर बिल्डर प्रतिनिधि और स्थानीय लोग आमने-सामने हो गए। हालांकि अंत में बिल्डर को रस्सी से ही असुरक्षित टावरों की घेराबंदी करनी पड़ी।