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पोल्ट्री फॉर्म संचालको के लिए प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

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गुरुग्राम। बर्ड फ्लू को देखते हुए जिला प्रशासन ने पोल्ट्री फॉर्म संचालकों के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसमें बीमार और मरे हुए पक्षी की सूचना तत्काल पशुपालन विभाग को देने के लिए कहा है। प्रशासन का कहना है कि अच्छे से पकाए गए चिकन या अंडे खाने में कोई खतरा नहीं है।
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प्रशासन की सलाह के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति मुर्गियों के सीधे संपर्क में नहीं आए और मुर्गियों को पकड़ने के दौरान दस्ताने या किसी भी अन्य सुरक्षा साधन का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करें। मालूम हो कि प्रदेश में बर्ड फ्लू ने दस्तक दे दी है, लेकिन गुरुग्राम में अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। पक्षियों के नमूने भेजे गए हैं, जिसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। प्रशासन ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि पक्षियों के पंख, म्यूकस और बींठ को नहीं छूएं। किसी वजह से छुए जाने की स्थिति में साबुन से तुरंत अच्छी तरीके से हाथ धोएं और मुर्गियों को बाड़े में रखें। संक्रमित पक्षियों को मारकर उनका सुरक्षित निपटान करें।
सीएमओ ने की बैठक
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र यादव ने भी बर्ड फ्लू से बचाव को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें आवश्यक दिशानिर्देश दिए। सिविल सर्जन ने कहा कि सभी स्वास्थ्यकर्मी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सक्रियता से काम करें और किसी भी पक्षी की आकस्मिक मौत होने की सूचना मिले तो तुरंत पशुपालन विभाग के अधिकारियों को बताएं। बीमार पक्षी के श्लेष्मा (म्यूकस) बींठ और पंखों के जरिए यह संक्रमण मनुष्यों में फैल सकता है। हालांकि, अभी तक भारत में पक्षियों से मनुष्यों में इस बीमारी के फैलने का कोई भी मामला सामने नहीं आया है।
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सामान्य फ्लू जैसे ही हैं लक्षण
सीएमओ ने बताया कि बर्ड फ्लू के प्रमुख लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं, जिसमें सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार, जुकाम और नाक बहना शामिल हैं। सावधानियों का उल्लेख करते हुए सिविल सर्जन ने कहा कि इन दिनों लोगों को मुख्य रूप से मुर्गियों व बीमार पक्षियों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। संक्रमित पक्षियों के मरने पर उन्हें सुरक्षित तरीके से मिट्टी में दबा देना चाहिए। बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग, वाइल्ड लाइफ और वेटनरी सर्जन के साथ बैठक कर आपसी तालमेल से काम किया जा रहा है ताकि बर्ड फ्लू की स्थिति से निपटा जा सके। इससे बचाव व नमूने एकत्र करने के लिए रैपिड रिस्पांस टीमें बनाई गई है।
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