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नागरिक अस्पताल के बाहर एंबुलेंस में उपचार के लिए तड़प रहे मरीज

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जिला नागरिक अस्पताल में बेड नहीं मिलने के कारण एंबुलेंस में इंतजार करता हुआ मरीज। - फोटो : Gurgaon
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गुरुग्राम। कोरोना संक्रमित अस्पताल के बाहर एंबुलेंस और प्राइवेट गाड़ियों में उपचार के लिए तड़प रहे हैं। प्राइवेट अस्पतालों में तो अब ऑक्सीजन की कमी बताकर भर्ती ही नहीं किया जा रहा है जबकि नागरिक अस्पताल में सुबह से देर शाम तक इस तरह के मरीजों की ऑक्सीजन सिलिंडर लगाए लंबी लाइन लगी रहती है। हालात अब ये हैं कि यहां एक बेड पर दो-दो मरीजों का उपचार हो रहा है।
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इतना ही नहीं, सेक्टर-10 के सरकारी अस्पताल में रविवार को इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर उपचार के लिए आने वाले मरीजों को एंबुलेंस और प्राइवेट वाहनों में ही प्राथमिक उपचार कर दूसरे निजी अस्पताल में रेफर करते रहे। जबकि वहां पहले से ही बेड न होने की बात कह दी थी।
भर्ती करने के लिए गुहार लगाता रहा
रविवार दोपहर करीब एक बजे न्यू कॉलोनी की रहने वाली शकुंतला देवी काफी समय तक एंबुलेंस में तड़पती रहीं। करीब एक घंटे बाद डॉक्टर पहुंचे। फिर उनको देखने के बाद निजी अस्पताल रेफर कर दिया। जबकि परिजन मरीज को भर्ती कराने की गुहार लगाते रहे। तीमारदार, विनीत कुमार का कहना है कि काफी समय तक वह अस्पताल के गेट के बाहर खड़े रहे। चेक करने के बाद डॉक्टरों ने निजी अस्पताल जाने की सलाह दी। जबकि इसके बाद उनके मरीज को शाम तक कहीं भी भर्ती नहीं किया गया।
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बस एक इंजेक्शन और कुछ टेबलेट दे दी
फरीदाबाद के फिरोज को वहां इलाज नहीं मिला तो वह प्राइवेट वाहन से गुरुग्राम के नागरिक अस्पताल में आया लेकिन उसे भी प्राथमिक उपचार में इंजेक्शन लगाया और कुछ टेबलेट देकर घर भेज दिया। जबकि फिरोज का कहना था कि उसको सांस लेने में दिक्कत आ रही है। तीसरा व्यक्ति व्हील चेयर पर ऑक्सीजन के साथ था। उसे भी इंजेक्शन लगाया और कुछ टेबलेट देकर भेज दिया।
चार घंटे में नहीं पहुंच रही एंबुलेंस
कोरोना महामारी के कारण साइबर सिटी में एंबुलेंस की कमी हो गई है। मरीजों को घर से अस्पताल तक ले जाने के लिए चार घंटे बाद भी एंबुलेंस नहीं मिल पा रही है। हेल्पलाइन से बताते हैं कि मरीजों को अपचार के लिए अस्पताल में बेड नहीं मिलने के कारण मरीज कई-कई घंटे तक एंबुलेंस रोक लेते हैं जिसकी वजह से समय पर एंबुलेंस पहुंचने का रुटीन नहीं बन पा रहा है। सेक्टर-67 निवासी राजीव कुमार ने अपने पिता को अस्पताल तक ले जाने के लिए रविवार दोपहर एक बजे फोन किया था। उनके पास चार बजे तक भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। यही स्थिति न्यू कॉलोनी निवासी राकेश कुमार के साथ हुई, उनकी माता को ले जाने के लिए तीन घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। इन परिस्थितियों में उन्हें प्राइवेट गाड़ी से ही अस्पताल ले जाना पड़ा।
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