फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्राइवेट एंबुलेंस की हड़ताल से मरीजों का बुरा हाल

विज्ञापन
विज्ञापन
गुरुग्राम। प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों की हड़ताल से मंगलवार को स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल हो गईं। मरीजों को घर से अस्पताल और अस्पताल से घर ले जाने के लिए तीमारदार परेशान रहे। उन्हें निजी वाहन इस्तेमाल करने पड़े, जिनके पास वाहन नहीं थे, उन्हें टैंपो का सहारा लेना पड़ा। कई टैंपो चालकों ने कोरोना संक्रमित मरीजों को अस्पताल ले जाने से इंकार कर दिया। पूरे दिन हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। गंभीर मरीजों को थोड़ा बहुत सहारा मिला तो सरकारी एंबुलेंस से।
विज्ञापन

प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों ने पिछले साल के बकाया 15 लाख रुपये और सोमवार को निर्धारित किए गए रेट के विरोध में मंगलवार से अचानक हड़ताल कर दी। इनका आरोप है कि आरटीए के इंस्पेक्टर हरेंद्र कुमार ने 20 एंबुलेंस नगर निगम के निर्देश पर चलाने के आदेश दिए हैं जबकि नगर निगम की ओर से न तो अथॉरिटी लेटर दिया गया है और न ही संक्रमित शवों को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए पीपीई किट, मास्क और गलव्स दिए हैं। इनका यह भी आरोप है कि सोमवार को जो रेट निर्धारित किया गया है, वह व्यवहारिक नहीं है। जिले में 500 प्राइवेट एंबुलेंस हैं। इनमें ऑक्सीजन सपोर्ट वाली 350, बाकी की 150 एंबुलेंस आईसीयू और एडवांस सपोर्ट सिस्टम वाली हैं।
ये हैं एसोसिएशन की मांग
एंबुलेंस एसोसिएशन के संयोजक सुरेंद्र तंवर का कहना है कि ऑक्सीजन सपोर्ट एंबुलेंस का रेट सात रुपये किलोमीटर तय किया है जबकि आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट एंबुलेंस के रेट 14 रुपये हैं जो कि व्यवहारिक नहीं है। इनका कहना है कि एडवांस सपोर्ट एंबुलेंस यहां से दिल्ली जाए तो उसका किराया 1300 रुपये ही होगा, जबकि उसमें डॉक्टर और एक सहायक साथ रहेगा। इस राशि से तो जो स्टाफ लगाया गया है, उसका भुगतान भी नहीं हो सकता। अत: रेट बढ़ाए जाएं। इन सभी समस्याओं को लेकर मंगलवार को जिला उपायुक्त को एसोसिएशन की ओर से एक ज्ञापन सौंपा गया है।
विज्ञापन

शव उठाने में भी हुई दिक्कत
हड़ताल के कारण तीमारदार अपने मरीज को लेकर बेबस दिखे और संक्रमितों शवों को उठाने के लिए लगी एंबुलेंस नदारद दिखीं जबकि अस्पताल में परिजन शवों को श्मशान घाट ले जाने की गुहार लगाते रहे।
दूसरे के वाहनों से पहुंचे अस्पताल
केस-1
राजीव नगर निवासी विवेक ने बताया कि उनके पिता राकेश की तबीयत खराब हो गई थी। काफी देर तक एंबुलेंस के लिए कॉल लगाई लेकिन कुछ बात नहीं बन सकी । इसके बाद निजी एंबुलेंस चालकों को फोन किया तो काम बंद होने की जानकारी मिली। आखिर में पड़ोसी की गाड़ी लेकर अस्पताल में पहुंचा।
केस-2
सेक्टर-15 निवासी रामेश्वर गुप्ता का कहना है कि उनकी पत्नी की तबियत खराब हो गई। सरकारी एंबुलेंस के लिए 108 नंबर नहीं लगा, प्राइवेट को कॉल किया तो हड़ताल की बात कहकर नहीं आए। आखिर में टैंपो से ही बीमार मरीज को प्राइवेट अस्पताल में उपचार के लिए ले गए।
केस-3
सेक्टर-56 निवासी नम्रता ने सरकारी एंबुलेंस के लिए संपर्क किया तो नंबर नहीं लगा। प्राइवेट ने हड़ताल के कारण इंकार कर दिया, तब अपनी बेटी आकांक्षा को अस्पताल तक ले जाने के लिए मजबूरी में टैंपो लिया। इस व्यवस्था को करने में डेढ़ घंटे लग गए।
ज्यादा किराया लेेने पर होगी कार्रवाई
आरटीए धारणा यादव ने आदेश दिया है कि जो भी प्राइवेट एंबुलेंस चालक ज्यादा राशि वसूलेगा उसके चालक का ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। इसके अलावा एंबुलेंस का लाइसेंस भी निरस्त होगा, वाहन जब्त करने के साथ-साथ 50 हजार रुपये का जुर्माना तथा एफआईआर भी दर्ज होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें