गुरुग्राम। कोरोना संक्रमण शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से फैलने लगा है जिसकी वजह से बिना इलाज के ग्रामीण दम तोड़ रहे हैं। एक तो ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच जागरूकता कम है। जो लोग जागरूक भी हैं तो उनको गुरुग्राम के अस्पतालों में इलाज नहीं मिल रहा है। ऐसे में पटौदी, फर्रुखनगर, सोहना आदि ग्रामीण इलाकों के मरीज रेवाड़ी तथा अन्य शहरों में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में पिछले महीने की तुलना में इस महीने इन दिनों बुखार, खांसी और जुकाम के कारण मरने वालों की संख्या 50 फीसदी से अधिक हो गई है। इनका टेस्ट न होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि उनकी मृत्यु संक्रमण से हुई है। हालांकि लक्षण कोरोना से संक्रमित होने के बताए जा रहे हैं।
ग्रामीणों में यह संक्रमण वहां के दूध, सब्जी विक्रेताओं तथा अन्य काम के लिए शहर में आने के कारण फैल रहा है। शहर में काम के लिए आने वाले लोग भीड़भाड़ वाले बाजारों में घूमते रहते हैं। घरों की कालोनियों और सोसाइटियों में दूध आदि सामान को देते हैं। वहीं से संक्रमित होकर वह गांव में पहुंच जाते हैं और उनके संपर्क में आने के कारण अन्य ग्रामीण भी संक्रमित हो रहे हैं।
शहर के लोग तो जागरूक हैं लेकिन ग्रामीण कोरोना संक्रमण के शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते। तबियत खराब होने पर वह शहर के अस्पतालों में इलाज के लिए आ रहे हैं। कोविड-19 का टेस्ट कराने पर उनके संक्रमित होने का पता चलता है। इलाज के लिए शहर पहुंचते हैं तो इन अस्पतालों के संचालक ऑक्सीजन के अभाव में इलाज से इंकार कर रहे है। ऐसे में कुछ लोग रेवाड़ी तथा अन्य जिलों में अपना उपचार करा रहे हैं। वहां थोड़ी बहुत सिफारिश करने पर बेड उपलब्ध हो रहे हैं। काफी मरीज ऐसे भी हैं जो कि गांवों में अपने घरों में रहकर इलाज करा रहे हैं उनके परिवार के लोग भी ठीक से सतर्कता नहीं बरतते हैं, जिसके कारण परिजन और आसपास के घरों में रहने वाले भी संक्रमित हो रहे हैं।
पटौदी निवासी रवि का कहना है कि वह इलाज के लिए गुरुग्राम गए लेकिन भर्ती नहीं किया। रेवाड़ी में परिचित की सिफारिश से बेड मिल गया। अब वहां इलाज करा रहे हैं। सोहना निवासी रामवीर का कहना है कि यहां के सरकारी अस्पताल में स्टाफ ठीक से इलाज नहीं करता। गुरुग्राम में डॉक्टरों ने मना कर दिया तो रेवाड़ी में इलाज करा रहे हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण इलाकों में इन दिनों खासी, बुखार और जुकाम से पीड़ित ज्यादा लोगों की मौत हो रही है
पटौदी निवासी नितिन कुमार पिछले कई दिनों से कोरोना पॉजिटिव हैं। उनका कहना है कि मां सुशीला देवी में कुछ हद तक कोरोना के लक्षण हैं लेकिन हम अपने घर पर ही रहकर कोरोना का इलाज कर रहे हैं क्योंकि पटौदी के उपमंडल नागरिक अस्पताल में कोराना मरीजों के लिए न तो आईसीयू न वेंटिलेटर की सुविधा। गुरुग्राम में बेड नहीं मिल रहे हैं। इतना ही नहीं कोरोना के भारी संख्या में मरीज भी हैं।
पुष्पांजलि अस्पताल के संचालक डॉ. एसपी यादव का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीजों को कम भर्ती कर रहे हैं। इन दिनों ग्रामीण क्षेत्र से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। उन सभी का यही कहना है कि वह ऑक्सीजन की व्यवस्था करा लें तो भर्ती करने में कोई दिक्कत नहीं होगी। उनका कहना है कि रेवाड़ी और आसपास के जिलों में पटौदी, फर्रुखनगर सहित कई ग्रामीण इलाकों के काफी मरीज भर्ती होने के लिए पहुंच रहे हैं। डॉ. एसपी यादव का कहना है कि ऑक्सीजन वितरण के लिए प्रशासन का सिस्टम ठीक नहीं है। टोकन सिस्टम भी सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। नौ मई से देखना है कि होम डिलीवरी सिस्टम कितना कारगर होगा। इतना ही नहीं यहां के सरकारी अस्पतालों में बेड की व्यवस्था नहीं है। सामान्य दिनों में बड़े और कॉरपोरेट अस्पतालों में इलाज महंगा होेने के कारण लोग नहीं जा सकते हैं। वैसे भी इन दिनों तो वहां पर भी इलाज के लिए बेड की मारामारी बनी हुई है।